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Publish Date: August 11, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आई.आई.टी. दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधित; प्रधानमंत्री द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित उच्च-प्रदर्शन संगणन सुविधा का शुभारंभ

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नई दिल्ली: माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 8 अगस्त, 2026 को आई.आई.टी. दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में  मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर उपाधि प्राप्त करने वाले 3036 विद्यार्थियों को संबोधित किया।

इस अवसर पर माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री, श्री प्रल्हाद जोशी तथा नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। श्री हरीश साल्वे, अध्यक्ष, बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स, आई.आई.टी. दिल्ली ने दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मेधावी विद्यार्थियों को संस्थान के सर्वोच्च सम्मानों, यथा राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, निदेशक स्वर्ण पदक, डॉ. शंकर दयाल शर्मा (भारत के पूर्व राष्ट्रपति) स्वर्ण पदक तथा परफेक्ट टेन स्वर्ण पदक से सम्मानित किया।


(फ़ोटो: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी बी.टेक. (कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरी) के विद्यार्थी आदित्य प्रकाश को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक प्रदान करते हुए।)

प्रधानमंत्री ने आई.आई.टी. दिल्ली के सोनीपत परिसर में स्थापित कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित उच्च-प्रदर्शन संगणन सुविधा ‘परम प्रज्ञा’ की ऑनलाइन माध्यम से शुरुआत की।

परम प्रज्ञा भारतीय शैक्षणिक जगत में अपने स्तर की नवीनतम सुपरकंप्यूटिंग सुविधा है। 400 एनवीडिया ए100 80जीबी GPU से युक्त यह सुविधा विभिन्न ए.आई. वर्कलोड के लिए महत्त्वपूर्ण कंप्यूटिंग क्षमता प्रदान करती है। ए.आई. कम्प्यूटिंग के संदर्भ में, परम प्रज्ञा की कंप्यूटिंग क्षमता 250 ए.आई. पेटाफ्लॉप है।

इस सुविधा में बड़ी कंप्यूटिंग क्षमता के अतिरिक्त 10 पेटाबाइट की पैरेलल फाइल सिस्टम स्टोरेज क्षमता भी उपलब्ध है जो बड़े पैमाने पर डेटा तक पहुँच को तीव्र और उसके त्वरित प्रसंस्करण को सक्षम बनाती है। इस उच्च-प्रदर्शन संगणन (HPC) सुविधा की स्थापना लगभग 800 किलोवाट ऊर्जा से संचालित एक आधुनिक डेटा सेंटर में की गई है, जिससे अनवरत ए.आई. प्रसंस्करण के लिए स्थिरता और दक्षता सुनिश्चित होती है। यह अत्याधुनिक अवसंरचना आई.आई.टी. दिल्ली के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर ए.आई.-आधारित नवाचार को बढ़ावा देने और उसे गति प्रदान करने के लिए तैयार है।

समारोह की गहन भावनात्मक अनुभूति को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने परिसर के जीवंत और सपनों से भरे वातावरण का उल्लेख किया। उन्होंने कोविड महामारी के दौरान अपनी पिछली वर्चुअल उपस्थिति को याद करते हुए कहा कि उपाधि प्राप्तकर्ता विद्यार्थियों के बीच व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना उनके लिए अत्यंत संतोष और हर्ष का विषय है। श्री मोदी ने कहा, “आज इस परिसर में आपके साथ इस अविस्मरणीय अनुभव को साझा करना मेरे लिए भी बहुत विशेष है।”

इस महत्त्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि पर विद्यार्थियों और उनके परिवारों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी उपाधियाँ केवल शैक्षणिक सफलता का प्रमाण नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र के प्रति योगदान देने की ज़िम्मेदारी भी हैं। उन्होंने पदक विजेताओं की विशेष रूप से सराहना की और संस्थान में नई ए.आई. पहलों के शुभारंभ का भी स्वागत किया। श्री मोदी ने कहा, “आप देश के लिए बहुत कुछ करने का सपना लेकर यहाँ से निकल रहे हैं।”

विद्यार्थियों को अपने वर्तमान क्षणों को संजोने के लिए प्रोत्साहित करते हुए प्रधानमंत्री ने परिसर की कुछ प्रिय स्मृतियों का हास्यपूर्ण ढंग से उल्लेख किया। उन्होंने कुमाऊँ, आरा, कारा, विंध्य, नीलगिरि, कैलाश और हिमाद्री छात्रावासों के बीच होने वाली अंतर-छात्रावास प्रतिद्वंद्विता के साथ-साथ जिया सराय के पोहे और सतपुड़ा मेस के पराठों जैसे स्थानीय पसंदीदा व्यंजनों का भी ज़िक्र किया। श्री मोदी ने कहा, “आने वाले समय में जब आप के कंधों पर बड़ी ज़िम्मेदारियाँ होंगी, तब इस जगह की यादें निश्चित रूप से आपको नई ऊर्जा प्रदान करेंगी।”

आई.आई.टी. की उपाधि के वास्तविक महत्त्व को नए संदर्भ में प्रस्तुत करते हुए प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि यह योग्यता केवल उच्च सी.जी.पी.ए. या आकर्षक नौकरी के प्रस्ताव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन्नत समस्या-समाधान क्षमताओं का एक विश्वसनीय वैश्विक प्रमाण-पत्र है। श्री मोदी ने कहा, “आपकी डिग्री पूरी दुनिया को बताती है कि आप अत्यंत कठिन समस्याओं को हल करना बखूबी जानते हैं।”

आर्थिक, तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार द्वारा किए जा रहे व्यापक प्रयासों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि युवा सशक्तिकरण ही विकसित भारत की मज़बूत आधारशिला है। उन्होंने प्रशासन के उन रणनीतिक नीतिगत निर्णयों की सराहना की, जिनके तहत पारंपरिक रूप से प्रतिबंधित क्षेत्रों को युवा नवप्रवर्तकों के लिए सुलभ बनाया गया है। श्री मोदी ने कहा, “देश के युवा जितने अधिक सशक्त होंगे, पूरा देश उतना ही अधिक सशक्त होगा।”

उपाधि प्राप्तकर्ता विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रो. रंगन बनर्जी, निदेशक, आई.आई.टी. दिल्ली ने कहा, “आज आप आत्मविश्वास से परिपूर्ण हैं, आपने देश के ऐसे सर्वोत्तम शिक्षण संस्थान से शिक्षा प्राप्त की है, जिसका नाम विश्व के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में लिया जाता है। अब आप जीवन की एक नई यात्रा पर आगे बढ़ रहे हैं तो मैं आपसे कुछ बातें कहना चाहूँगा। आपने यहाँ जो सीखा है, उसे सदैव याद रखें; यह भी याद रखें कि सीखना जीवन भर का सिलसिला है। किसी भी परिस्थिति में नैतिकता और सत्यनिष्ठा के मार्ग का ही चयन करें। अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों के साथ-साथ समाज के व्यापक हितों को भी प्राथमिकता दें; ऐसा करने पर आपके व्यक्तिगत उद्देश्य भी स्वाभाविक रूप से पूरे होते चले जाएँगे। अपने जीवन में संतुलन बनाए रखें। अपनी रुचियों तथा अपने प्रियजनों के लिए समय निकालना भूलें। मैं आपके उत्तम स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। हमें विश्वास है कि आप संस्थान के आदर्शों को साकार करेंगे और आई.आई.टी. दिल्ली को समस्त भारतवासियों के गौरव का विषय बनाने में अपना अमूल्य योगदान देंगे।

दीक्षांत समारोह में वर्ष 2026 में स्नातक हुए बैचलर ऑफ़ डिज़ाइन, एग्जीक्यूटिव एम.बी.ए., जैविक विज्ञान में एम.एससी. तथा संस्कृति, समाज एवं विचार में एम.ए. पाठ्यक्रमों के प्रथम बैच के विद्यार्थियों को भी उपाधियां प्रदान की गईं।

57वें दीक्षांत समारोह में उन्नीस वर्षीय अनीश तंवर, बी.टेक. (सिविल इंजीनियरी) सबसे कम उम्र के स्नातक हैं जबकि 74 वर्षीय चंद्र शेखर प्रसाद (पीएच.डी. शोधार्थी) उपाधि प्राप्त करने वाले सबसे अधिक उम्र के विद्यार्थी हैं।  कुल 587 पीएच.डी. उपाधि प्राप्तकर्ताओं में से 245 महिलाएँ हैं।

अलम्नाई अवार्ड्स

57वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर आई.आई.टी. दिल्ली ने अपने प्रतिष्ठित पूर्व विद्यार्थियों को अलम्नाई अवार्ड्स 2026 से सम्मानित किया। श्री हरीश साल्वे, अध्यक्ष, बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स, आई.आई.टी. दिल्ली ने पुरस्कार प्रदान किए। संस्थान के विशिष्ट पूर्व विद्यार्थी पुरस्कार (डिस्टिंग्विश्ड अलम्नाई अवार्ड) आई.आई.टी. दिल्ली के पूर्व विद्यार्थियों; प्रो. राजशेखर बालासुब्रमणयन, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर (शैक्षणिक एवं अनुसंधान श्रेणी); श्री श्रीकांत प्रभाकर जोशी, सी.ई.ओ., एल. एंड टी. रियल्टी (उद्योग एवं कॉर्पोरेट नेतृत्व श्रेणी); डॉ. रवि एस. प्रशर, मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी, ब्लूम एनर्जी (उद्योग एवं कॉर्पोरेट नेतृत्व श्रेणी); श्री अमित लोढ़ा, आई.पी.एस., ए.डी.जी.पी., स्टेट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो, बिहार (लोक सेवा श्रेणी); तथा डॉ. विवेक राघवन, सह-संस्थापक, सर्वम ए.आई. (उद्यमिता श्रेणी) को प्रदान किए गए।

पिछले दशक के स्नातक (गोल्ड) पुरस्कार श्री आनंद अग्रवाल, सह-संस्थापक एवं मुख्य उत्पाद तथा प्रौद्योगिकी अधिकारी, क्रेडजेनिक्स; तथा श्री अभय मित्रा, सह-संस्थापक एवं मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी, निर्वाण इंश्योरेंस को प्रदान किए गए।