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Publish Date: July 27, 2026

आई.आई.टी. दिल्ली में आई.पी.पी.डी. 2026 का सफल आयोजन: "प्लाज़्मा प्रवाह: विरासत एवं समाज पहल" के अंतर्गत सतत विकास के लिए प्लाज़्मा प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन

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नई दिल्ली, 15 जुलाई, 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली ने 1 जुलाई, 2026 से 3 जुलाई, 2026 तक औद्योगिक प्लाज़्मा प्रक्रियाओं एवं निदान (आई.पी.पी.डी. 2026) पर तृतीय वैश्विक मंच एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया। ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरी विभाग (डी. ई. एस. ई.) तथा भौतिकी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस सम्मेलन में भारत और विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत के अग्रणियों , शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। आई.पी.पी.डी. 2024 और आई.पी.पी.डी. 2025 की सफलता की निरंतरता में आयोजित इस सम्मेलन ने प्लाज़्मा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की उभरती वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका को और सुदृढ़ किया तथा समाजहित में अंतर्विषयक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के प्रति आई.आई.टी. दिल्ली की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया।

प्रो. बिभूति भूषण साहू, ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरी विभाग, आई.आई.टी. दिल्ली ने इस सम्मेलन की परिकल्पना की तथा उनके संयोजन में इसका सफल आयोजन संपन्न हुआ। उद्घाटन समारोह में प्रो. रंगन बनर्जी, निदेशक, आई.आई.टी. दिल्ली की  गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरणीय सततता, स्वास्थ्य सेवा और उन्नत विनिर्माण से संबंधित वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अंतःविषयक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के महत्त्व पर जोर दिया। प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए, आई.पी.पी.डी. 2026 के संयोजक प्रो. बिभूति भूषण साहू ने सम्मेलन की परिकल्पना पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसका उद्देश्य युवा शोधकर्ताओं को प्रेरित करना, शिक्षा-जगत और उद्योग के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना तथा सामाजिक अनुप्रयोगों के लिए प्लाज़्मा विज्ञान को आगे बढ़ाना है। प्रो. रमेश नारायणन, अध्यक्ष आई.पी.पी.डी. 2026 और अध्यक्ष, ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरी विभाग (डी.ई.एस.ई.) ने अनुसंधान उत्कृष्टता और नवाचार के माध्यम से जीवन को बेहतर बनाने वाली प्लाज़्मा-आधारित प्रौद्योगिकियों के विकास के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया।

आई.पी.पी.डी. 2026 का एक मुख्य विषय आधुनिक समाज में प्लाज़्मा—पदार्थ की चौथी अवस्था—के बढ़ते महत्त्व पर केंद्रित था। जहाँ प्लाज़्मा प्राकृतिक रूप से सूर्य, तारों और आकाशीय बिजली में मौजूद है, वहीं कृत्रिम रूप से विकसित प्लाज़्मा आधुनिक दैनिक जीवन में अपरिहार्य बन गए हैं। आज, प्लाज़्मा सेमीकंडक्टर चिप निर्माण, सौर सेल, एल.ई.डी. डिस्प्ले, चिकित्सा उपकरणों के विसंक्रमण, प्लाज़्मा चिकित्सा, जल एवं अपशिष्ट जल शोधन, खाद्य संरक्षण, कृषि, कपड़ा प्रसंस्करण, प्रदूषण नियंत्रण, हाइड्रोजन उत्पादन, कार्बन डाइऑक्साइड रूपांतरण, उन्नत कोटिंग्स, एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों और नाभिकीय संलयन अनुसंधान को सक्षम बना रहा है। इस सम्मेलन में प्लाज़्मा को स्वच्छ ऊर्जा, सतत विनिर्माण, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक प्रमुख सक्षमकारी प्रौद्योगिकी के रूप में रेखांकित किया गया।

वैज्ञानिक कार्यक्रम में चार पूर्ण सत्र व्याख्यान, दस मुख्य व्याख्यान, आमंत्रित वार्ताएँ, उद्योग सत्र, विद्यार्थियों की  मौखिक प्रस्तुतियाँ, पोस्टर प्रस्तुतियाँ तथा पैनल चर्चाएँ शामिल थीं। इनमें प्रयोगशाला प्लाज़्मा, प्लाज़्मा  डायग्नोस्टिक्स, संलयन विज्ञान, अर्धचालक प्रसंस्करण, प्लाज़्मा चिकित्सा, कृषि, उन्नत सामग्री, पर्यावरणीय प्रौद्योगिकियों और औद्योगिक प्लाज़्मा अनुप्रयोगों जैसे विषयों को शामिल किया गया।

सम्मेलन का शुभारंभ प्रोफ़ेसर एंथनी ब्रूस (टोनी) मर्फी (सी.एस.आई.आर.ओ., ऑस्ट्रेलिया) के मुख्य व्याख्यान "CO₂ उत्सर्जन में कमी के लिए हाइड्रोजन का उपयोग करने वाले प्लाज़्मा अनुप्रयोग" से हुआ। इस व्याख्यान में औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन को कम करने और सतत ऊर्जा प्रणालियों को सक्षम बनाने के लिए प्लाज़्मा-सहायित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों पर प्रकाश डाला गया।

सबसे प्रेरक मुख्य आकर्षणों में से एक, प्रोफ़ेसर राम प्रकाश (आई.आई.टी. जोधपुर) का "विश्व को भय (FEAR) की स्थिति से निष्पक्ष व न्यायपूर्ण (FAIR) स्थिति की ओर ले जाने के लिए प्लाज़्मा विज्ञान और प्रौद्योगिकी" विषयक मुख्य व्याख्यान था। उन्होंने इस बात पर एक दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया कि कैसे प्लाज़्मा विज्ञान स्वच्छ ऊर्जा, सतत कृषि, उन्नत स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण-अनुकूल विनिर्माण तथा समावेशी तकनीकी विकास के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों को अवसरों में परिवर्तित कर सकता है। समाज को "भय से निष्पक्षता व न्याय” (FEAR से FAIR) की ओर रूपांतरित करने के उनके प्रभावशाली संदेश को व्यापक सराहना मिली और यह आई.पी.पी.डी. 2026 के प्रमुख विषयों में से एक बन गया।

सम्मेलन में कई प्रतिष्ठित सत्र व्याख्यान भी शामिल थे, जिनमें प्रोफ़ेसर ई. हा चोई (क्वांगवून विश्वविद्यालय, दक्षिण कोरिया) द्वारा क्वांटम कृषि और पर्यावरण विज्ञान के लिए प्लाज़्मा पर, प्रोफ़ेसर तपोब्रत सोम (भौतिकी संस्थान, भुवनेश्वर) द्वारा विभिन्न वैज्ञानिक विषयों में प्लाज़्मा के अनुप्रयोगों पर तथा प्रोफ़ेसर जेरार्ड ऑस्कर रोड्रिग्स (इंटर-यूनिवर्सिटी एक्सेलेरेटर सेंटर, नई दिल्ली) द्वारा प्लाज़्मा विज्ञान और संलयन ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक प्रगति पर व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध विशेषज्ञों द्वारा दिए गए व्याख्यानों में संलयन प्लाज़्मा, अर्धचालक प्रौद्योगिकियों, प्लाज़्मा चिकित्सा, उन्नत कोटिंग्स, नैनोमैटेरियल्स, वायुमंडलीय प्लाज़्मा, हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों तथा औद्योगिक प्लाज़्मा प्रसंस्करण के क्षेत्र में हालिया विकास को प्रस्तुत किया गया।

आई.पी.पी.डी. 2026 का एक अन्य प्रमुख आकर्षण उद्योग जगत की मजबूत भागीदारी रही। समर्पित उद्योग सत्रों ने शोधकर्ताओं और औद्योगिक विशेषज्ञों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा दिया, जिससे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को प्रोत्साहन मिला तथा शिक्षा जगत एवं उद्योग के बीच साझेदारी को सुदृढ़ किया गया। देशभर के प्रमुख संस्थानों से आए युवा शोधकर्ताओं ने मौखिक और पोस्टर सत्रों के माध्यम से अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए तथा उत्कृष्ट प्रस्तुतियों को समापन समारोह के दौरान पुरस्कार प्रदान किए गए।

सम्मेलन का एक अविस्मरणीय क्षण प्रोफेसर ए. गांगुली के सम्मान में आयोजित विशेष समारोह रहा, जिसमें प्लाज़्मा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट, अग्रणी एवं दीर्घकालिक योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया गया। प्रतिभागियों ने उनकी दशकों लम्बी वैज्ञानिक उत्कृष्टता, दूरदर्शी नेतृत्व और वैश्विक प्लाज़्मा अनुसंधान समुदाय पर उनके स्थायी प्रभाव का सम्मान किया ।

सम्मेलन के समापन अवसर पर, आई.पी.पी.डी. 2026 के संयोजक प्रोफ़ेसर बिभूति भूषण साहू ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रतिष्ठित वक्ताओं, प्रतिनिधियों, उद्योग साझेदारों, प्रायोजकों, आयोजन समिति के सदस्यों, स्वयंसेवकों तथा प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आई.पी.पी.डी. 2026 ने वैज्ञानिक विनिमय, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रौद्योगिकी विकास के लिए एक जीवंत मंच तैयार करने के साथ ही स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरणीय सततता, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, अर्धचालक प्रौद्योगिकियों तथा उन्नत विनिर्माण से संबंधित चुनौतियों के समाधान में प्लाज़्मा विज्ञान की परिवर्तनकारी भूमिका को और सुदृढ़ किया है।

आई.पी.पी.डी. 2026 के सफल समापन के साथ, आई.आई.टी. दिल्ली ने एक बार फिर प्लाज़्मा विज्ञान एवं इंजीनियरी के क्षेत्र में भारत के अग्रणी केंद्रों में से एक के रूप में अपनी स्थिति को सुदृढ़ किया है। इस सम्मेलन ने विश्वस्तरीय वैज्ञानिक प्रगति को प्रदर्शित करने के साथ-साथ "प्लाज़्मा प्रवाह: विरासत और समाज पहल" के दृष्टिकोण को भी सुदृढ़ किया, जिसका उद्देश्य प्लाज़्मा अनुसंधान को ऐसी प्रौद्योगिकियों में रूपांतरित करने को बढ़ावा देना है, जो एक स्वच्छ, स्वस्थ, अधिक सतत तथा तकनीकी रूप से सशक्त समाज के निर्माण में योगदान दे सकें।