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Publish Date: May 27, 2026

खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा के विकल्पों पर विमर्श हेतु आई.आई.टी. दिल्ली में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

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इस संगोष्ठी ने भारत के ऊर्जा इकोसिस्टम हेतु विनियामकीय सुदृढ़ता, प्रौद्योगिकी-संचालित समाधान एवं परिचालन रणनीतियाँ के परीक्षण के लिए एक त्वरित एवं सामयिक मंच प्रदान किया।

नई दिल्ली: केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सी.ई.आर.सी.), ग्रिड कंट्रोलर ऑफ़ इंडिया (ग्रिड इंडिया) तथा आई.आई.टी. दिल्ली की संयुक्त पहल के रूप में स्थापित विद्युत क्षेत्र में विनियामक मामलों हेतु उत्कृष्टता केंद्र (सी.ओ.ई.) ने हाल ही में आई.आई.टी. दिल्ली में “सिस्टम संचालन एवं विनियामक दृष्टिकोण से ऊर्जा सुरक्षा और आगे की राह (एनर्जी सिक्योरिटी थ्रू सिस्टम ऑपरेशन एंड रेगुलेटरी लेंस एंड वे फॉरवर्ड)” विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया।

इस संगोष्ठी में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उपायों पर विचार-विमर्श हेतु वरिष्ठ नीति-निर्माताओं, रेगुलेटर्स, तकनीकी विशेषज्ञों, यूटिलिटीज़ एवं शैक्षिक नेतृत्वकर्ताओं ने सहभागिता की।

वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में बढ़ती अस्थिरता — विशेषकर खाड़ी क्षेत्र के संघर्ष से उत्पन्न आपूर्ति व्यवधानों तथा भारत द्वारा अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का 85 प्रतिशत से अधिक आयात किए जाने- की पृष्ठभूमि में इस संगोष्ठी ने भारत के ऊर्जा पारितंत्र के लिए नियामकीय सुदृढ़ता, प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों तथा परिचालन रणनीतियों पर विचार-विमर्श हेतु एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और सामयिक मंच प्रदान किया।

श्री वी. अनंत नागेश्वरन, मुख्य आर्थिक सलाहकार, भारत सरकार ने “एनर्जी सिक्योरिटी, ट्रांज़िशन एंड द कॉस्ट्स ऑफ विशफुल थिंकिंग” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने एक प्रकार की भू-राजनीतिक निर्भरता को दूसरे रूप में प्रतिस्थापित करने के प्रति सावधानी बरतने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि संकेंद्रित स्वच्छ ऊर्जा सप्लाई चेन, जीवाश्म ईंधन आयात निर्भरता के समान रणनीतिक जोखिम उत्पन्न करती हैं। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने रेखांकित किया कि भारत का ऊर्जा रूपांतरण वित्तीय रूप से विवेकपूर्ण, उपयुक्त रूप से चरणबद्ध तथा महत्त्वपूर्ण खनिजों एवं प्रौद्योगिकी के लिए घरेलू एवं सहयोगी सप्लाई चेन पर आधारित होना चाहिए।

श्री जिष्णु बरुआ, अध्यक्ष, सी.ई.आर.सी. ने इस बात पर बल दिया कि भारत वर्तमान में वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के दौर से गुज़र रहा है। भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का 85% आयात करता है तथा इसमें से 45% आयात भू-राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से होकर गुज़रते हैं, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा भौगोलिक रूप से विविध क्षेत्रों पर निर्भर बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि भारत की रणनीतिक बढ़त केवल आत्मनिर्भरता में नहीं, बल्कि विकल्पों की उपलब्धता में भी निहित है, जिसमें आपूर्तिकर्ताओं का विविधीकरण, रणनीतिक भंडारों का निर्माण, परिवहन क्षेत्र में तेल पर निर्भरता को कम करना तथा महत्त्वपूर्ण खनिजों के लिए सप्लाई चेन दृढ़ता सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने रेगुलेटर्स एवं संबंधित हितधारकों से ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता एवं वहनीयता की त्रिधारा के संतुलन हेतु दूरदर्शी एवं अनुकूलनशील विनियामकीय ढाँचे विकसित करने का आग्रह करते हुए अपने वक्तव्य का समापन किया।

श्री संतोष कुमार सारंगी, सचिव, एम.एन.आर.ई. ने भारत की 537 जी.डब्ल्यू. की प्रभावशाली आर.ई. क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि अब वास्तविक चुनौती केवल क्षमता वृद्धि नहीं, बल्कि इंटेलिजेंट ग्रिड इंटीग्रेशन सुनिश्चित करने में है। उन्होंने बताया कि भारत की वैरिएबल आर.ई. कुल विद्युत उत्पादन का केवल 15% है, जबकि जर्मनी में यह 50% तथा ऑस्ट्रेलिया में 35% है। इस कारण भारत को भी समान मार्केट-आधारित मैकेनिज्म्स एवं ग्रिड मॉडर्नाइजेशन स्ट्रेटेजीज़ अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बल दिया कि विनियामकीय सुधार आवश्यक हैं, जिनमें  25-वर्ष पुराने मॉडल के स्थान पर कम अवधि वाले 12–15 वर्षीय पी.पी.ए., अधिक सशक्त रियल-टाइम मार्केट्स तथा कॉन्ट्रैक्ट्स फॉर डिफरेंस जैसे उपकरण शामिल हैं। उन्होंने गेट क्लोज़र टाइम को कम करने संबंधी सी.ई.आर.सी. के स्टाफ पेपर का स्वागत किया। उन्होंने जानकारी दी कि एम.एन.आर.ई. ट्रांसमिशन नेटवर्क के उन्नयन हेतु बजट संबंधी सहयोग सुनिश्चित करने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ कार्य कर रहा है तथा उन्होंने सुझाव दिया कि स्टोरेज को एक कोर एसेट के रूप में देखा जाना चाहिए।

पैनल 1 – ऊर्जा सुरक्षा, सततता और वहनीयता

इस पैनल में अध्यक्ष, सी.ई.ए.; अध्यक्ष, यू.पी.ई.आर.सी.; डी.जी., ए.आई.डी.ए.; सी.एम.डी., एन.टी.पी.सी. लिमिटेड तथा एक पूर्व राजदूत शामिल थे। सत्र का संचालन सचिव, सी.ई.आर.सी., श्री हरप्रीत सिंह प्रुथी द्वारा किया गया। सत्र में पश्चिम एशिया संकट, ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण बढ़ती जटिलताओं, गैस आपूर्ति व्यवधानों से विद्युत उत्पादन एवं वित्तीय स्थिति पर पड़ रहे प्रभावों तथा ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता एवं वहनीयता के बीच संतुलन की आवश्यकता पर चर्चा की गई।

चर्चा के दौरान आयातित बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के प्रभावी पूरक के रूप में पम्प्ड स्टोरेज जलविद्युत की रणनीतिक महत्ता, परिवहन तथा पाक-ऊर्जा क्षेत्र के तीव्र विद्युतीकरण, ‘टाइम-ऑफ़-डे’ टैरिफ व्यवस्था के क्रियान्वयन तथा आयातित ईंधनों पर निर्भरता कम करने में परमाणु ऊर्जा की निर्णायक भूमिका पर विशेष बल दिया गया। साथ ही आयातित ऊर्जा स्रोतों के स्थान पर स्वदेशी एवं वैकल्पिक ऊर्जा उपायों को बढ़ावा देने की आवश्यकता रेखांकित की गई; उदाहरणस्वरूप तेल के विकल्प के रूप में एथेनॉल, गैस के स्थान पर कोयला गैसीकरण तथा आयातित कोयले के स्थान पर घरेलू कोयला उत्पादन विस्तार एवं परमाणु ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।

पैनल 2 – विनियामकीय एवं प्रौद्योगिक नवाचार

इस पैनल में सदस्य (फाइनेंस), सी.ई.आर.सी.; सी.ई.ओ., बी.एस.ई.एस. राजधानी पावर लिमिटेड; तथा सीनियर फेलो, सी.एस.ई.पी. (ऑनलाइन माध्यम से) शामिल थे। सत्र का संचालन प्रमुख (आर.ए.), सी.ई.आर.सी., डॉ. एस. के. चटर्जी द्वारा किया गया। सत्र में भारत की वर्तमान बेस लोड प्रणालियों से इंटरमिटेंट रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों एवं उनकी फ्लेक्सिबिलिटी युक्त प्रणालियों की ओर बढ़ते रुझान के संदर्भ में विनियामकीय एवं प्रौद्योगिक नवाचार पर चर्चा की गई। इसमें पी.एस.पी., सी.एस.पी. एवं डी.ई.आर. के साथ-साथ ए.आई. एवं एम.एल. इंटरवेंशन तथा टेक्नॉलजी एडॉप्शन की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। इसके अतिरिक्त, पैनल ने उभरती स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी एवं भू-राजनीतिक सप्लाई व्यवधानों से निपटने हेतु भारत के विनियामकीय फ्रेमवर्क के आधुनिकीकरण की तात्कालिक आवश्यकता को रेखांकित किया।

पैनल 3 – सिस्टम ऑपरेशन एंड ग्रिड रिलायबिलिटी

समापन सत्र के पैनल में ग्रिड इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सी.एम.डी.), केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सी.ई.आर.सी.) के सदस्य (तकनीकी) तथा केरल राज्य विद्युत बोर्ड (के.एस.ई.बी.) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शामिल रहे। सत्र का संचालन आई.आई.टी. दिल्ली स्थित ‘विद्युत क्षेत्र में विनियामक मामलों हेतु उत्कृष्टता केंद्र’ के समन्वयक प्रो. अभिजीत अभ्यंकर द्वारा किया गया। चर्चा के प्रमुख विषयों में एंसिलरी सर्विसेज मार्केट्स, इनर्शिया मैनेजमेंट, कंजेशन मैनेजमेंट, एस.एल.डी.सी.-आर.एल.डी.सी.-एन.एल.डी.सी. समन्वय तथा क्रॉस-बॉर्डर इलेक्ट्रिसिटी ट्रेड शामिल थे। चर्चा के एक महत्त्वपूर्ण भाग में दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक क्षेत्रीय विद्युत बाज़ार विकसित करने की व्यवहार्यता एवं रणनीतिक महत्त्व पर विचार किया गया, जिसमें भारत की संभावित नेतृत्वकारी भूमिका पर भी चर्चा हुई।