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Publish Date: March 25, 2026

क्यू.एस. विषय रैंकिंग 2026: आई.आई.टी. दिल्ली पांच प्रमुख विषयों में दुनिया के शीर्ष 50 में; भारत के शीर्षतम इंजीनियरी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के रूप में कायम

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नई दिल्ली : बुधवार (25 मार्च, 2026) को घोषित नवीनतम क्यू.एस. वैश्विक विश्वविद्यालय की विषयवार रैंकिंग 2026 के अनुसार आई.आई.टी. दिल्ली ने इंजीनियरी और प्रौद्योगिकी के कई प्रमुख विषयों में अपनी वैश्विक रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है और वैश्विक शीर्ष 50 विषयों में अपनी जगह बनाई है। इसके अलावा, वैश्विक रैंकिंग 36 के साथ आई.आई.टी. दिल्ली इंजीनियरी और प्रौद्योगिकी श्रेणी में भारत का शीर्ष संस्थान बना हुआ है।

क्यू.एस. विषय रैंकिंग 2026 के अनुसार विद्युत इंजीनियरी, यांत्रिक  इंजीनियरी, कंप्यूटर विज्ञान, रासायनिक  इंजीनियरी,  और सिविल इंजीनियरी ने विश्व के शीर्ष 50 विषयों में स्थान प्राप्त किया है। वर्ष 2025 में, शीर्ष 50 में शामिल होने वाला एकमात्र विषय विद्युत इंजीनियरी था।

2026 की रैंकिंग में, विद्युत इंजीनियरी को शीर्षतम यानी 36वीं  रैंक मिली है; इसके बाद यांत्रिक  इंजीनियरी (44वें), कंप्यूटर विज्ञान (45वें), रासायनिक  इंजीनियरी (48वें), और सिविल इंजीनियरी (50वें) स्थान पर रहा। इन सभी पाँचों विषयों में 2026 की रैंकिंग में पिछले साल की तुलना में काफ़ी सुधार हुआ है।

2025 की रैंकिंग: विद्युत (47वें), यांत्रिक (61वें), कंप्यूटर विज्ञान (64वें), रासायनिक (93वें), और सिविल (51-100वें) स्थान पर थे।

रैंकिंग के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त करते हुए,  प्रो. सोमनाथ बैद्य रॉय, संकायाध्यक्ष (योजना) ने कहा कि “आई.आई.टी. दिल्ली विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय एवं सुलभ शिक्षा प्रदान करता है, जिसके फलस्वरूप वे अकादमिक, औद्योगिक, वाणिज्यिक तथा शासन-प्रशासन के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभाते हैं। यद्यपि रैंकिंग हमारे समस्त कार्यकलापों के व्यापक परिप्रेक्ष्य को पूर्णतः अभिव्यक्त नहीं करतीं, तथापि वे हमारे द्वारा किए गए सतत परिश्रम एवं प्रतिबद्धता की महत्त्वपूर्ण स्वीकृति अवश्य हैं।”

विद्युत इंजीनियरी विभाग द्वारा अर्जित विषय-आधारित रैंकिंग पर टिप्पणी करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. शंकर प्रक्रिया ने कहा, “विद्युत इंजीनियरी विभाग की उन्नत क्यू.एस. अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग हमारे सुदृढ़ विकास-पथ को प्रतिबिंबित करती है। हमने जिन प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है, उनमें हम तीव्र प्रगति कर रहे हैं। आधुनिकीकृत पाठ्यक्रमों, उन्नत प्रयोगशालाओं, वी.एल.एस.आई. डिज़ाइन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा जैसी  नई  पहलों तथा हमारे एक पूर्व विद्यार्थी के सहयोग से स्थापित विद्यार्थी नवाचार प्रयोगशाला के ज़रिए हम नवाचार और उत्कृष्टता को प्रोत्साहित कर रहे हैं। ये प्रयास हमें आगामी वर्षों में स्थायी और सतत विकास हेतु सशक्त आधार प्रदान करते हैं।

डॉ. पी.एम.वी. सुब्बाराव, अध्यक्ष , यांत्रिक इंजीनियरी विभाग ने कहा कि “उन्नत रैंकिंग इंजीनियरी में उत्कृष्टता के प्रति हमारे अडिग समर्पण का प्रतिबिंब है। हमने मूलतः अपने प्रयासों को जारी रखा और साथ ही ए.आई. संवर्धित तकनीकों में अग्रणी भूमिका निभाई—जिससे हमें यह यकीन होता है कि हम प्रगति के पथ पर अग्रसर हैं और रैंकिंग में हमारी उत्कृष्ट गतिविधियाँ परिलक्षित होती हैं। विभाग ने डी.आर.डी.ओ. द्वारा वित्तपोषित जे.ए.टी.सी. (JATC) में उल्लेखनीय योगदान दिया है। RuTAG और अन्य पहलों के माध्यम से सामाजिक रूप से प्रासंगिक और सतत तकनीकों में हमारा योगदान हमेशा मजबूत रहा है।”

प्रो. नवीन गर्ग, अध्यक्ष, कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरी विभाग ने कहा कि “कंप्यूटर विज्ञान विभाग अत्यंत प्रतिभाशाली युवा संकाय सदस्यों और शोधकर्ता विद्यार्थियों को लगातार आकर्षित करता रहा है, जिससे इसका शैक्षणिक वातावरण सशक्त होता है और यह देश के सबसे प्रतिष्ठित कंप्यूटर विज्ञान विभागों में अपनी स्थिति सुदृढ़ करता है। हाल के पाठ्यक्रम सुधारों ने गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता किए बिना शैक्षणिक पाठ्यक्रमों को अधिक लचीला बनाया है। इसके साथ ही, कंप्यूटिंग अवसंरचना में निरंतर निवेश हमारी क्षमताओं को और उन्नत बनाते है  तथा हमें 2030 तक वैश्विक स्तर पर कंप्यूटर विज्ञान के शीर्ष 30 विभागों में  शामिल होने में सहयोग करते हैं।”

प्रो. अनुराग राठौर, अध्यक्ष, रासायनिक इंजीनियरी विभाग ने कहा, “पिछले 5 वर्षों में रु. 40 करोड़ से अधिक के औद्योगिक वित्तपोषण, पेटेंटों में 75% की वृद्धि, और सहकर्मी-समीक्षित (पीयर रीव्यूड) प्रकाशनों में 50% की बढ़ोतरी के साथ, रासायनिक इंजीनियरी विभाग लगातार देश के सबसे प्रतिष्ठित विभागों में से एक के रूप में स्थान प्राप्त कर रहा है। हमारे उत्कृष्टता केंद्र, स्टार्टअप्स और हमारी वैश्विक पहलें हमारे प्रभाव को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती हैं। हमारा उद्देश्य किफ़ायती और सतत तकनीकी समाधान विकसित करना है, जो देश और विश्व की स्वास्थ्य, ऊर्जा, पर्यावरण और सामग्री संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करें।”

प्रो. वसंत मतसागर, अध्यक्ष, सिविल एवं पर्यावरण इंजीनियरी विभाग ने कहा, “हमने पाठ्यक्रमों को पूर्णतः नया स्वरूप प्रदान किया है ताकि उनमें नवीनतम प्रौद्योगिकियों जैसे— निर्माण स्वचालन एवं रोबोटिक्स, मानव रहित हवाई वाहन (यू.ए.वी.) / ड्रोन प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग, तथा जियोमैटिक्स को सम्मिलित किया जा सके। विभाग के संकाय सहयोगी उच्च-मूल्य प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाओं का संचालन कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य जलवायु-संवेदनशील अवसंरचना विकास में सततता प्राप्त करने हेतु नवीन प्रथाओं का विकास करने के साथ ही आपदा सहनशीलता को सुनिश्चित करना भी है।”

नवीनतम क्यू.एस. विषय-आधारित रैंकिंग के अनुसार, आई.आई.टी. दिल्ली के इंजीनियरी एवं प्रौद्योगिकी, प्राकृतिक विज्ञान तथा सामाजिक विज्ञान एवं प्रबंधन जैसे व्यापक क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले बारह प्रमुख विषयों ने उल्लेखनीय रूप से शीर्ष 100 की सूची में स्थान प्राप्त किया है।

इंजीनियरी एवं प्रौद्योगिकी: डेटा साइंस एवं ए.आई. (स्थान: 51–100), खनिज एवं खनन (स्थान: 51–100) (पाँच अन्य विषय शीर्ष 50 में शामिल हैं)

प्राकृतिक विज्ञान: पर्यावरण विज्ञान (स्थान: 78), पदार्थ विज्ञान (स्थान: 64), गणित (स्थान: 86)

सामाजिक विज्ञान एवं प्रबंधन  : व्यवसाय एवं प्रबंध अध्ययन (स्थान: 71), सांख्यिकीय एवं संचालन अनुसंधान (स्थान: 51–100)

भारत का अग्रणी इंजीनियरी व अनुसंधान संस्थान तथा विश्व के शीर्ष STEM संस्थानों में से एक, आई.आई.टी. दिल्ली, इंजीनियरी एवं प्रौद्योगिकी श्रेणी में वैश्विक स्तर पर शीर्ष 50 संस्थानों में शामिल है। साथ ही, यह प्राकृतिक विज्ञान के क्षेत्र में 91वें तथा सामाजिक विज्ञान व प्रबंधन  के क्षेत्र में 84वें स्थान के साथ विश्व के शीर्ष 100 संस्थानों में भी सूचीबद्ध है।

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(NB- In case of any ambiguity, or difference in meaning between the English version of the press note and a translated Hindi version, the English version should be considered final)