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Publish Date: May 14, 2026

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली द्वारा उद्योग सदस्यता कार्यक्रम की शुरुआत

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नई दिल्ली: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (आई.आई.टी. दिल्ली) ने एक उद्योग सदस्यता कार्यक्रम शुरू किया है। यह उद्योग जगत के साथ दीर्घकालिक और रणनीतिक साझेदारियाँ विकसित करने हेतु डिज़ाइन किया गया एक व्यवस्थित, सशुल्क सहभागिता मॉडल है।

संस्थान के कॉर्पोरेट संबंध कार्यालय द्वारा संचालित यह कार्यक्रम उद्योग एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को सुदृढ़ करने, कॉर्पोरेट भागीदारों के साथ संकाय की सक्रिय सहभागिता को बढ़ावा देने, विषयगत अनुसंधान एवं नवाचार कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने तथा अनुसंधान प्रयोगशालाओं जैसी संस्थागत सुविधाओं तक पहुँच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। साथ ही, यह कार्यक्रम संकाय विशेषज्ञता की दृश्यता एवं व्यापक प्रसार को भी सशक्त बनाता है। इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम के अंतर्गत अनुकूलित प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा पुस्तकालय संसाधनों तक पहुँच की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

उद्योग सदस्यता कार्यक्रम के अंतर्गत श्रेणीबद्ध सदस्यता उपलब्ध कराई गई है:

रजत सदस्यता — 10 लाख रुपये प्रति वर्ष
स्वर्ण सदस्यता — 20 लाख रुपये प्रति वर्ष
प्लैटिनम सदस्यता — 50 लाख रुपये प्रति वर्ष

यह सदस्यता संगठनों को अनुसंधान, नवाचार, प्रतिभा विकास तथा संस्थागत पहलों में संस्थान के साथ जुड़ने में सक्षम बनाएगी।

इसके अतिरिक्त, उद्योग सदस्यता कार्यक्रम के अंतर्गत सदस्यों को पेटेंट, प्रौद्योगिकियों तथा अनुसंधान निष्कर्षों तक शीघ्र पहुँच भी प्राप्त होगी।

कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
• समर्पित संबंध प्रबंधन
• अनुसंधान कार्यसूचियों के सह-निर्माण एवं दीर्घकालिक सहयोग के अवसर
• संकाय, अनुसंधान प्रयोगशालाओं तथा विषयगत गतिविधियों तक पहुँच
• CXO राउंडटेबल, नेतृत्व मंच तथा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) कॉन्क्लेव सहित सुव्यवस्थित उद्योग सहभागिता मंच

प्रो. जयंत जैन, संकायाध्यक्ष, कॉर्पोरेट संबंध, आई.आई.टी. दिल्ली ने कहा, “हमें विश्वास है कि यह पहल उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच सतत जुड़ाव के लिए एक सशक्त मंच तैयार करेगी, जिससे सार्थक अनुसंधान सहयोग, नवाचार-आधारित साझेदारियाँ तथा विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख संगठनों के साथ व्यापक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।”

प्रो. जैन ने आगे कहा, “यह कार्यक्रम स्वदेशी अनुसंधान, नवाचार तथा उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान एवं विकास (R&D) को सुदृढ़ बनाने पर भारत के बढ़ते फोकस के अनुरूप है। यह भारत को वैश्विक ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की राष्ट्रीय परिकल्पना को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।”

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