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Publish Date: July 2, 2026

आई.आई.टी. दिल्ली द्वारा स्वदेशी ए. आई.-आधारित एयरोस्टैट सर्वेलन्स टेक्नॉलजी (Aerostat Surveillance Technology) का सफल प्रदर्शन

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                              डी.आर.डी.ओ. समर्थित परियोजना के अंतर्गत डीप-टेक स्टार्टअप्स के सहयोग से विकसित प्रौद्योगिकी।

                                         

नई दिल्ली: भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस और निगरानी क्षमताओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए, आई.आई.टी. दिल्ली ने अकादमिक जगत, उद्योग और डीप-टेक स्टार्टअप्स के अनूठे समन्वित  सहयोग के माध्यम से विकसित ए.आई.-आधारित एयरोस्टैट सर्वेलन्स प्रणाली (tethered Aerostat surveillance) का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन उन्नत अनुसंधान को राष्ट्रीय सुरक्षा एवं नागरिक अनुप्रयोगों के लिए उपयोगी और कार्यान्वयन योग्य प्रौद्योगिकी में रूपांतरित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

प्रौद्योगिकी प्रदर्शन के दौरान, लगभग 24 घन मीटर आयतन वाले एक सामरिक एयरोस्टैट गुब्बारे को 30 मीटर की ऊँचाई पर उड़ाया गया।  इस एयरोस्टैट ने निगरानी, सुरक्षा तथा दूरस्थ संचार जैसे विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए 10 किलोग्राम तक के पेलोड का सफलतापूर्वक वहन किया। ।

एयरोस्टैट वायु से हल्के प्लेटफ़ॉर्म होते हैं, जो हीलियम गैस की सहायता से लंबे समय तक हवा में बने रहते हैं तथा कैमरों और सेंसरों को लेकर निरंतर हवाई निगरानी उपलब्ध कराते हैं। ड्रोन की तुलना में, एयरोस्टैट अधिक लंबी अवधि तक उड़ान बनाए रखने की क्षमता, कम संचालन लागत, निरंतर निगरानी, अधिक पेलोड क्षमता और बेहतर विश्वसनीयता प्रदान करते हैं, जिससे वे सीमा निगरानी, आपदा प्रबंधन, अवसंरचना निगरानी, पर्यावरण अवलोकन, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए एक आदर्श समाधान हैं।

यह सफल तकनीक आई.आई.टी. दिल्ली में डी.आर.डी.ओ. इंडस्ट्री एकेडेमिया-सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस (DIA-CoE) द्वारा वित्तपोषित SITEX-I और SITEX-II अनुसंधान कार्यक्रमों का परिणाम है। वस्त्र एवं रेशा इंजीनियरी विभाग की प्रो. मंगला जोशी और प्रो. बी. एस. बटोला के मार्गदर्शन में, शोधकर्ताओं ने उन्नत स्वदेशी एयरोस्टैट सामग्री (hull) तथा पदार्थ और इंजीनियरिंग तकनीकों का विकास किया, जिससे जिससे सामरिक महत्त्व की आयातित सामग्रियों पर निर्भरता में कमी आई तथा भारत में वायु-से-हल्की (Lighter-than-Air) प्रणालियों के विकास के लिए एक सुदृढ़ आधार स्थापित हुआ।

इस शोध को आगे बढ़ाते हुए, GB Texcoat Solution Pvt. Ltd., जो FITT-IIT दिल्ली से इन्क्यूबेटेड एक डीप-टेक स्टार्टअप है, ने अपनी स्वामित्व वाली उच्च-प्रदर्शन कोटेड टेक्सटाइल सामग्रियों का उपयोग करके पूरी एयरोस्टैट प्रणाली का विकास और निर्माण किया। ये सामग्रियाँ बेहतर हीलियम प्रतिधारण, हल्के वजन, टिकाऊपन और सभी मौसमों में संचालन के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

                          

(फोटो: एयरोस्टैट में लगे कैमरे द्वारा ली गई छवि, जिसे बाद में किसी वस्तु की पहचान करने और विश्लेषण प्राप्त करने के लिए एक ए.आई. मॉडल द्वारा विश्लेषित किया गया)

प्रदर्शन के दौरान, एयरोस्टैट ने सफलतापूर्वक एक उच्च-रिज़ॉल्यूशन निगरानी पेलोड का सफलतापूर्वक वहन करते हुए स्वदेशी प्लेटफ़ॉर्म के उत्कृष्ट प्रदर्शन को प्रमाणित किया। साथ ही, आई.आई.टी. दिल्ली के संकाय द्वारा संचालित डीप-टेक स्टार्टअप CYRAN AI ने उन्नत एज एआई (Edge AI) एल्गोरिद्म की सहायता से वास्तविक समय में प्राप्त हवाई चित्रों का विश्लेषण किया, जिससे वस्तुओं की बुद्धिमत्तापूर्ण पहचान एवं वर्गीकरण, गतिविधियों की पहचान तथा स्वचालित चेतावनी (अलर्ट) जारी करने जैसी अत्याधुनिक क्षमताओं का सफल प्रदर्शन संभव हुआ।

यह प्रदर्शन भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की शक्ति को दर्शाता है, जहाँ सरकार समर्थित अनुसंधान, शैक्षणिक संस्थान और स्टार्टअप मिलकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सामरिक प्रौद्योगिकियों का निर्माण करने के लिए साझेदारी करते हैं। रक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करने के अलावा, स्वदेशी एयरोस्टैट प्रणालियाँ आपदा प्रबंधन में सुधार, सार्वजनिक सुरक्षा, महत्त्वपूर्ण अवसंरचना की निगरानी, कृषि, पर्यावरण प्रबंधन और स्मार्ट सिटी अनुप्रयोगों के माध्यम से समाज को महत्त्वपूर्ण रूप से लाभान्वित कर सकती हैं।

यह सफल प्रदर्शन “आत्मनिर्भर भारत” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण कदम है, जो भारत को उन्नत निगरानी प्रणालियों और वायु से हल्की तकनीकों के क्षेत्र में एक वैश्विक लीडर के रूप में स्थापित करता है।