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Publish Date: January 5, 2026

आई.आई.टी. दिल्ली के शोधकर्ताओं द्वारा मानव वैज्ञानिकों की तरह वास्तविक वैज्ञानिक प्रयोग कर सकने वाले कृत्रिम एजेंट 'AILA' का निर्माण

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नई दिल्ली: कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसी प्रयोगशाला में प्रवेश कर रहे हैं जहाँ एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सूक्ष्मदर्शी को सावधानीपूर्वक समायोजित कर रही है, उसका प्रयोग कर रही है और परिणामों का विश्लेषण कर रही है। आई.आई.टी. दिल्ली के शोधकर्ताओं ने डेनमार्क और जर्मनी के सहयोगियों के साथ मिलकर इसे साकार कर दिखाया है, जिसे हाल ही में प्रकाशित नेचर कम्युनिकेशंस के 'परमाणु बल सूक्ष्मदर्शी के स्वचालन के लिए बड़े भाषा मॉडल एजेंटों का मूल्यांकन' (‘Evaluating large language model agents for automation of atomic force microscopy’) विषयक शोध पत्र में विस्तार से बताया गया है। (शोध पत्र का लिंक: 10.1038/s41467-025-64105-7)

अब तक, चैटजीपीटी जैसे एआई मॉडल दस्तावेज़ तैयार करने, प्रश्नों के उत्तर देने और डेटा का विश्लेषण करने में सहायता करते हुए मुख्य रूप से डिजिटल सहायक के रूप में काम करते रहे हैं। लेकिन शोधकर्ताओं ने अब इन सीमाओं को पार करते हुए एआईएलए (आर्टिफिशियली इंटेलिजेंट लैब असिस्टेंट-AILA) विकसित किया है, जो एक ऐसा एआई एजेंट है जो वास्तविक प्रयोगशालाओं में प्रवेश कर सकता है और एक मानव वैज्ञानिक की तरह वैज्ञानिक प्रयोगों को शुरू से अंत तक अंजाम दे सकता है।

"AILA मेरे रोज़मर्रा के प्रयोग संबंधी कार्यों में मेरी मदद करता है और मेरे शोध की प्रगति को काफी तेज करता है," यह बात इस शोध के प्रथम लेखक और आई.आई.टी. दिल्ली के अंतर्विद्याशाखायी अनुसंधान स्कूल में प्रो. एन. एम. अनूप कृष्णन (सिविल इंजीनियरी और यार्डी कृत्रिम बौद्धिकता स्कूल, आई.आई.टी. दिल्ली) और प्रो. नित्यानंद गोस्वामी (पदार्थ विज्ञान एवं इंजीनियरी, आई.आई.टी. दिल्ली) के मार्गदर्शन में पीएचडी कर रहे इंद्रजीत मंडल ने साझा की। इंद्रजीत ने आगे कहा, "पहले उच्च-रिज़ॉल्यूशन और शोर-मुक्त छवियों के लिए माइक्रोस्कोप के मापदंडों को अनुकूलित करने में पूरा दिन लग जाता था; अब वही काम सिर्फ 7-10 मिनट में पूरा हो जाता है।"

यह शोध एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोप (एएफएम), जो एक अत्याधुनिक उपकरण है और पदार्थों का अत्यंत सूक्ष्म पैमाने पर अध्ययन करता है, पर केंद्रित था। उल्लेखनीय रूप से, AILA अब इस जटिल उपकरण को नियंत्रित कर सकता है, प्रयोगों के दौरान वास्तविक समय में निर्णय ले सकता है और परिणामों को स्वतंत्र रूप से विश्लेषित कर सकता है।

प्रोफेसर अनूप कृष्णन ने विस्तार से बताया कि, “इसे इस तरह समझिए - पहले, एआई केवल विज्ञान के बारे में लिखने में आपकी मदद कर सकता था। अब यह वास्तव में प्रयोगों की योजना बनाते, उन्हें वास्तविक उपकरणों पर चलाते, डेटा एकत्रित करते और परिणामों की व्याख्या करते हुए वैज्ञानिक कार्य कर सकता है।”

प्रोफेसर नित्यानंद गोस्वामी ने कहा कि “एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोप पदार्थ अनुसंधान में सबसे जटिल और संवेदनशील वैज्ञानिक उपकरणों में से एक है।” प्रोफेसर गोस्वामी ने आगे कहा कि : “इसे प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए नैनोस्केल भौतिकी, सरफेस इंटरैक्शंस और वास्तविक समय प्रतिक्रिया नियंत्रण की गहरी समझ आवश्यक है — ये ऐसे कौशल हैं जिन्हें हासिल करने में शोधकर्ताओं को आमतौर पर वर्षों लग जाते हैं। AILA द्वारा इन कार्यों को स्वायत्त रूप से करने की क्षमता प्रायोगिक विज्ञान के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव है।” 
यह शोध कई समर्पित शोधकर्ताओं के सहयोग से संभव हो पाया। योगदान देने वाली टीम के सदस्यों में जितेंद्र सोनी (आई.आई.टी. दिल्ली) और ज़ाकी (आई.आई.टी. दिल्ली) शामिल हैं। परियोजना टीम में मॉर्टन एम. स्मेडस्केयर (आलबर्ग विश्वविद्यालय, डेनमार्क), कैटरिन वोंड्रेज़ेक (लीबनिज़ इंस्टीट्यूट ऑफ फोटोनिक टेक्नॉलजी, जर्मनी) और लोथर वोंड्रेज़ेक (जेना विश्वविद्यालय, जर्मनी) भी शामिल हैं।

हालांकि, इस यात्रा में कई महत्वपूर्ण चुनौतियाँ सामने आईं। शोधकर्ताओं ने पाया कि विज्ञान के प्रश्नों के उत्कृष्ट उत्तर देने से एआई विज्ञान के कार्यों में निपुण नहीं हो जाता। पदार्थ विज्ञान की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मॉडल वास्तविक प्रयोगशाला स्थितियों, जहाँ त्वरित अनुकूलन की आवश्यकता होती है, में जूझते दिखे। इंद्रजीत ने कहा कि, "यह ठीक वैसा ही है जैसे पाठ्यपुस्तक से ड्राइविंग नियमों को जानने और व्यस्त शहर के ट्रैफिक में वाहन चलाने के बीच का फ़र्क ।"

शोध में सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएँ भी उजागर हुईं। एआई एजेंट का प्रदर्शन कभी-कभी निर्देशों के अनुरूप नहीं रहा, जिससे यह बात स्पष्ट होती है कि प्रयोगशालाओं में स्वचालन (ऑटोमेशन) की ओर बढ़ते समय दुर्घटनाओं या उपकरणों की क्षति को रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों को लागू करना आवश्यक है।

यह महत्त्वपूर्ण उपलब्धि भारत की महत्त्वाकांक्षी पहल ‘विज्ञान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)’ के अनुरूप है। सरकार ने हाल ही में अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के माध्यम से देश भर में AI-आधारित अनुसंधान को गति देने के लिए बड़ी धनराशि की घोषणा की है।

प्रोफेसर कृष्णन ने कहा कि AILA जैसी प्रौद्योगिकियां भारत के वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि, "स्वायत्त प्रयोगशाला सहायक उन्नत प्रायोगिक क्षमताओं तक पहुंच को सहज व लोकतांत्रिक बना सकते हैं।"

प्रोफेसर गोस्वामी ने कहा कि “भारत भर के विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान, यहां तक कि वे भी जिनके पास व्यापक बुनियादी ढांचा या विशेषज्ञ कर्मचारी नहीं हैं, अत्याधुनिक सामग्री का अनुसंधान कर सकते हैं।” 

ऐसे वक़्त में, जब भारत ऊर्जा भंडारण, टिकाऊ सामग्री और उन्नत विनिर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, एआई सिस्टम खोज की गति को काफी तेज कर सकते हैं। यह कार्य भारत के बढ़ते एआई और वैज्ञानिक अनुसंधान परिदृश्य में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश को बढ़ावा देने की संभावना के साथ भारतीय वैज्ञानिकों को स्वायत्त प्रायोगिक विज्ञान के इस उभरते क्षेत्र में वैश्विक नेताओं के रूप में भी स्थापित करता है, जिससे आकर्षित होने की संभावना है।

प्रकाशन तिथि: 23 दिसंबर, 2025