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Publish Date: August 20, 2025

आई.आई.टी. दिल्ली ने हाइली इन्फेक्शियस पैथोजेन्स से संबंधित अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए बायोसेफ्टी लेवल 3 अनुसंधान सुविधा आरंभ

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नई दिल्ली: जैव-चिकित्सा और क्लिनिकल डायग्नोस्टिक्स अनुसंधान में क्रांतिकारी बदलाव के उद्देश्य से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (आई.आई.टी. दिल्ली) ने केन्द्रीय अनुसंधान सुविधा के अंतर्गत बायोसेफ्टी लेवल 3  (बी.एस.एल. 3) सुविधा आरंभ की । यह नई सुविधा क्लास-3 पैथोजेन्स के लिए डायग्नोस्टिक उपकरणों और चिकित्सा विज्ञान में अनुसंधान को सुगम बनाएगी, जो भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में अपनी तरह की पहली पहल है।

19 अगस्त 2025 को प्रो. अरविंद नेमा, उप निदेशक (प्रचालन), आई.आई.टी. दिल्ली ने इस अनुसंधान सुविधा की शुरुआत की। इस अवसर पर प्रो. संदीप के. झा, प्रभारी प्रोफेसर, बायोसेफ्टी लेवल 3 अनुसंधान सुविधा; प्रो. समीर सपरा, अध्यक्ष, सी.आर.एफ., आई.आई.टी. दिल्ली; प्रो. मणिदीपा बनर्जी, सह-अध्यक्ष, सी.आर.एफ.; प्रो. नीतू सिंह, अध्यक्ष, जैव-चिकित्सा इंजीनियरी केंद्र, आई.आई.टी. दिल्ली; तथा प्रोफेसर अशोक के. पटेल, के.एस.बी.एस., आई.आई.टी. दिल्ली उपस्थित रहे।

यह अभूतपूर्व उपलब्धि भारत की जैव-चिकित्सा अनुसंधान क्षमताओं में महत्त्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है तथा स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में नवाचार को आगे बढ़ाने के प्रति आई.आई.टी. दिल्ली की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है।

प्रो. अरविंद नेमा, उप निदेशक (प्रचालन), आई.आई.टी. दिल्ली ने कहा कि “यह नई अनुसंधान एवं परीक्षण सुविधा, चिकित्सा डायग्नोस्टिक्स और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को सक्षम बनाएगी तथा स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में शैक्षिक और उद्योग जगत की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आई.आई.टी. दिल्ली के प्रयासों को सशक्त करेगी। यह सुविधा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को एक साझे मंच पर अत्याधुनिक अनुसंधान का अवसर प्रदान करेगी। इसके माध्यम से एन.सी.आर. सहित देश भर के चिकित्सा संस्थानों के साथ अनुसंधान सहयोग के कई नए अवसर भी सृजित होंगे।”

यह नई अनुसंधान सुविधा आई.आई.टी. दिल्ली की केन्द्रीय अनुसंधान सुविधा के अंतर्गत परिसर में स्थित माइक्रोमॉडल कॉम्प्लेक्स में स्थित है। यह सुविधा शैक्षिक और उद्योग जगत के शोधार्थियों के लिए सी.आर.एफ. के निर्धारित मानदंडों के अनुसार लघु से मध्यम अवधि के लिए सहायक व्यवस्था और शुल्क के साथ उपलब्ध होगी।

बी.एस.एल. 3 अनुसंधान सुविधा स्टार्टअप्स और एम.एस.एम.ई. को अतिरिक्त लाभ पहुँचाएगी क्योंकि वे इन विशिष्ट सुविधाओं में निवेश किए बिना अपने हार्डवेयर और कार्मिकों को इस सुविधा के भीतर लाकर त्वरित अनुसंधान एवं विकास कर सकेंगे।

प्रो. संदीप के. झा, जैव-चिकित्सा इंजीनियरी केंद्र एवं इस सुविधा के प्रभारी प्रोफेसर ने कहा कि “हम आई.आई.टी. दिल्ली में चिकित्सा डायग्नोस्टिक्स इकोसिस्टम को एक नया आयाम प्रदान करते हुए गर्व महसूस कर रहे हैं। भारत में अन्य बी.एस.एल. 3 सुविधाओं के विपरीत, यह पहली बार होगा जब कोई उपयोगकर्ता अपने चिकित्सा उपकरण को इकाई में ले जाकर क्लास-3 पैथोजेन्स प्रबंधन में विशेषज्ञता प्राप्त प्रशिक्षित पेशेवरों की देखरेख में परीक्षण कर सकेगा। इससे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपने डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म को सुविधा के भीतर डीबग और फाइन-ट्यून कर सकेंगे।”

इस पहल का सह-नेतृत्व करने वाले प्रो. अशोक के. पटेल, कुसुमा जैव विज्ञान स्कूल, आई.आई.टी. दिल्ली ने कहा: “देश में इस प्रकार की सहायक प्रवेश सुविधा पहले नहीं थी, जिससे उपकरण निर्माताओं को अपने उत्पादों को परीक्षण हेतु विशेष बी.एस.एल. 3 और बी.एस.एल. 4 प्रयोगशालाओं में भेजना पड़ता था और उपकरण के निष्पादन को शीघ्र सुधारना और बेहतर बनाना कठिन हो जाता था।”

  प्रकाशन तिथि: 20 अगस्त 2025