News

Publish Date: January 5, 2026

आई.आई.टी. दिल्ली अध्ययन: सटीक लोकेशन अनुमति वाले एंड्रॉइड ऐप्स से प्रयोक्तओं की निजी जानकारी हो सकती है उजागर

Share this on

अध्ययन बताता है कि जीपीएस कमज़ोर सिग्नल वाली जगहों में भी मोबाइल प्रयोक्ताओं के तत्कालीन स्थान (छोटा कमरा, बड़ा कमरा, भूमिगत, भूमि के ऊपर, हवाई जहाज आदि) इमारत की बनावट और मानवीय गतिविधि की प्रकृति का पता लगाना संभव है।

नई दिल्ली: जीपीएस के बारे में सोचते ही हमारे दिमाग में गूगल मैप्स की छवि आती है जो हमें किसी कैफ़े या डिलीवरी को ट्रैक करने वाले किसी ऑनलाइन ऐप तक ले जाती है। लेकिन असल में, हर आधुनिक स्मार्टफोन आवृत्ति, शोर और तीव्रता में छोटे-छोटे उतार-वाले दर्जनों सूक्ष्म जीपीएस सिग्नल प्राप्त करता है जिन पर ज़्यादातर प्रयोक्ता ध्यान नहीं देते और जीपीएस सॉफ़्टवेयर को इनकी आवश्यकता भी नहीं होती।


सोहम नाग, एम.टेक छात्र, साइबर सिस्टम और सूचना सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र, आई.आई.टी. दिल्ली और डॉ. स्मृति आर. सारंगी, प्रोफेसर, कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरी विभाग, आई.आई.टी. दिल्ली द्वारा किए गए अभूतपूर्व शोध से पता चलता है कि ये छिपे हुए संकेत केवल स्थान बताने से कहीं अधिक जानकारी दे सकते हैं: वे चुपचाप किसी व्यक्ति की गतिविधि, परिवेश और यहां तक कि उस कमरे या मंजिल की बनावट का भी खुलासा कर सकते हैं जिसमें वह मौजूद है।

“AndroCon: An Android Phone-based Sensor for Ambient, Human Activity and Layout Sensing using Fine-Grained GPS Information” शीर्षक से यह अध्ययन, गोपनीयता-जागरूक संवेदन के क्षेत्र में अग्रणी पत्रिका ए.सी.एम. ट्रांजैक्शंस ऑन सेंसर नेटवर्क्स में प्रकाशित हुआ है।

(अध्ययन का लिंक- https://www.cse.iitd.ac.in/~srsarangi/files/papers/acm_tosn_GPS.pdf)

शोधकर्ताओं ने एंड्रोकॉन नामक एक प्रणाली का प्रस्ताव रखा है, जो यह प्रदर्शित करने वाली पहली प्रणाली है कि सटीक स्थान अनुमतियों वाले एंड्रॉइड ऐप्स के लिए पहले से ही उपलब्ध "बारीक" जीपीएस डेटा एक गुप्त सेंसर के रूप में कार्य कर सकते हैं। कैमरा, माइक्रोफ़ोन या मोशन सेंसर का उपयोग किए बिना, एंड्रोकॉन नौ निम्न-स्तरीय जीपीएस मापदंडों - जैसे डॉप्लर शिफ्ट, सिग्नल पावर और मल्टीपाथ इंटरफेरेंस - की व्याख्या करके यह अनुमान लगाता है कि कोई व्यक्ति बैठा है, खड़ा है, लेटा है, मेट्रो के अंदर है, हवाई जहाज में है, पार्क में है या किसी भीड़भाड़ वाले बाहरी स्थान पर है। यह इस बात का भी अनुमान लगा सकता है कि कमरा भरा हुआ है या खाली है।

इस विकृत कच्ची सामग्री (noisy raw data) को स्पष्ट जानकारी में बदलने के लिए, उन्होंने पारंपरिक सिग्नल प्रोसेसिंग को आधुनिक मशीन लर्निंग के साथ संयोजित किया। प्रो. स्मृति आर. सारंगी, कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरी विभाग, आई.आई.टी. दिल्ली ने कहा कि "40,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में और कई अलग-अलग फोनों पर किए गए एक साल के अध्ययन में, एंड्रोकॉन ने परिवेश का पता लगाने में 99% तक और मानवीय गतिविधियों, यहां तक कि फोन के पास हाथ हिलाने जैसी सूक्ष्म गतिविधियों को भी पहचानने में 87% से अधिक सटीकता हासिल की  है।"

यही फ्रेमवर्क जीपीएस पैटर्न और प्रयोक्ता पथ का उपयोग करके 4 मीटर से कम की त्रुटि सीमा के साथ कमरे, सीढ़ियों और लिफ्ट की पहचान करते हुए इनडोर फ्लोर मैप भी बना सकता है।

हालाँकि एंड्रोकॉन संदर्भ-जागरूक और गोपनीयता का सम्मान करने वाली स्मार्ट सेवाओं के लिए रोमांचक संभावनाएं खोलता है, तथापि यह एक महत्त्वपूर्ण सुरक्षा खामी को भी उजागर करता है। सटीक स्थान अनुमतियों वाला कोई भी एंड्रॉइड ऐप प्रयोक्ताओं की स्पष्ट सहमति के बिना संवेदनशील संदर्भ जानकारी प्राप्त कर सकता है।

प्रो. सारंगी ने कहा, "यह अध्ययन जीपीएस का एक अनदेखा पहलू उजागर करता है: यह हमारे आसपास की दुनिया को महसूस कर सकने वाला एक शक्तिशाली लेकिन मूक चैनल है। एंड्रोकॉन रोज़मर्रा के स्मार्टफोन को अप्रत्याशित रूप से सटीक वैज्ञानिक उपकरण में बदल देता है और यह याद दिलाता है कि सबसे परिचित तकनीकों में भी छिपे हुए रहस्य होते हैं जिनका दुरुपयोग दुर्भावनापूर्ण तत्त्वों द्वारा किया जा सकता है।"
 
*****

प्रकाशन तिथि: 30  अक्टूबर