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Publish Date: January 5, 2026

उच्च शिक्षा संस्थानों के माध्यम से ग्रामीण भारत को बदलने के लिए “उन्नत भारत अभियान” के सफल 11 वर्ष

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शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल “उन्नत भारत अभियान (UBA)” ने 11 नवंबर, 2025 को अपना स्थापना दिवस मनाया। यह कार्यक्रम उच्च शिक्षा संस्थानों (HEI) की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से ग्रामीण भारत को बदलने के प्रति समर्पण के ग्यारह वर्षों को दर्शाता है।

11 नवंबर, 2014 को शिक्षा मंत्रालय ने तत्कालीन भारत के राष्ट्रपति की अध्यक्षता में यू.बी.ए कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। आई.आई.टी. दिल्ली कार्यक्रम की शुरुआत से ही यू.बी.ए. का राष्ट्रीय समन्वय संस्थान (नेशनल कोऑर्डिनेटिंग इंस्टीट्यूट) रहा है।

शिक्षा मंत्रालय के मार्गदर्शन में यू.बी.ए. प्रौद्योगिकी स्थानान्तरण, ग्रामीण उद्यमिता और नीति-संबंधी शोध को बढ़ावा देते हुए शैक्षणिक और ज़मीनी स्तर के लोगों के बीच पुल का कार्य करता है। इस पहल ने सोलर माइक्रोग्रिड और बायोगैस यूनिट से लेकर बाजरा-आधारित उद्यमों और कौशल प्रशिक्षण केंद्र तक सफलता की कई कहानियां गढ़ी है- जो समावेशी विकास के रूप में उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) की क्षमता को दर्शाता है।

यू.बी.ए. के स्थापना दिवस पर, पूरे भारत में 1,100 से ज्यादा संस्थानों ने कई कार्यक्रम किए, जिनमें 20,000 से ज्यादा विद्यार्थियों, संकायों और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। यू.बी.ए. प्रकोष्ठों ने विलेज इमर्शल कैम्पस समुदाय जागरूकता अभियान, ग्रामीण नवाचार प्रदर्शनियों, पारंपरिक ज्ञान कार्यशालाओं और युवा विलेज डायलॉग जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए। इन गतिविधियों ने विद्यार्थियों को गांव की वास्तविक ज़िंदगी के बारे में जागरूक किया और विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्र से जुड़े नवोन्मेषी मॉडल दिखाए।

आई.आई.टी. दिल्ली में आयोजित स्थापना दिवस समारोह में प्रो. वीरेंद्र कुमार विजय, राष्ट्रीय समन्वयक, यू.बी.ए.; प्रो. पूजा घोष एन.सी.आर. की आर.सी.आई. (रीजनल कोऑर्डिनेटिंग इंस्टीट्यूशन) यू.बी.ए. समन्वयक; प्रो. संगीता कोहली, खुरमपुर गांव की यू.बी.ए.पी.आई. की समन्वयक; और प्रो. अंकेश जैन, एन.एस.एस प्रभारी ने दर्शकों को संबोधित किया और आई.आई.टी. दिल्ली के विद्यार्थियों के साथ यू.बी.ए. ग्राम समूह में विभिन्न गतिविधियों पर चर्चा की।

प्रो. वीरेंद्र कुमार विजय, राष्ट्रीय समन्वयक, यू.बी.ए. ने शिक्षा मंत्रालय और सहभागी संस्थानों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “यू.बी.ए. की सफलता तकनीक को जोड़ने से पहले दिलों को जोड़ने में है-यह सुनिश्चित किया जाए कि भारत के युवा गांवों को पिछड़ी जगहों के तौर पर न देखें, बल्कि नवाचार, संस्कृति और लचीलेपन की जीती-जागती प्रयोगशालाओं के तौर पर देखें।”

चूँकि यू.बी.ए. अपने बारहवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, यह देश के उच्च शिक्षा संस्थानों की सामूहिक शक्ति के माध्यम से एक आत्मनिर्भर, ज्ञान-संचालित और टिकाऊ ग्रामीण भारत की ओर बढ़ते हुए ग्राम स्वराज और आत्मनिर्भर भारत के आदर्शों को साकार करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत कर रहा है।

2014 में अपनी शुरुआत से, यू.बी.ए. एक तेज़ी से आगे बढ़ने वाला राष्ट्रीय आंदोलन बन गया है जो ज्ञान और तकनीक के माध्यम से अनुभवात्मक शिक्षा, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा देते हुए भारत के उच्च शिक्षा इकोसिस्टम को गांवों से जोड़ता है। 

मात्र एक दशक से ज्यादा समय में, यू.बी.ए. का नेटवर्क बढ़कर 4600 सहभागी संस्थानों तक पहुंच गया है, जो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 22,000 गांवों को जोड़ता है। इस कार्यक्रम ने चुनौतियों की पहचान करने और टिकाऊ स्थानीय समाधान करने के लिए ग्रामीण समुदायों के साथ सक्रिय रूप से जुड़े देशभर के विश्वविद्यालयों, आई.आई.टी., एन.आई.टी. और कॉलेजों के दस लाख से ज्यादा विद्यार्थियों और 25,000  संकाय सदस्यों को एक साथ जोड़ा है।

इसका मूल सिद्धांत विद्यार्थियों में सामाजिक ज़िम्मेदारी की गहरी भावना और भारत के पारंपरिक ज्ञान के प्रति सम्मान पैदा करते हुए ज्ञान और नवाचार के माध्यम से ग्रामीण भारत को बदलना है। क्लासरूम पढ़ाई को ज़मीनी हकीकत के साथ जोड़ते हुए और कृषि, ऊर्जा जल प्रबंधन और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधुनिक विज्ञान और देशी तरीकों को मिलाते हुए यू.बी.ए. युवाओं को ग्रामीण बदलाव लाने में मदद करता है। 

प्रकाशन दिनांक: 13 नवम्बर, 2025