News

Publish Date: January 5, 2026

मांग पक्ष ऊर्जा प्रबंधन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता समर्थित स्मार्ट डिवाइस विकसित करने के लिए आई.आई.टी. दिल्ली और पूर्व क्षेत्रीय लोड डिस्पैच सेंटर (ERLDC) ने की साझेदारी

Share this on

नई दिल्ली: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (आई.आई.टी. दिल्ली) ने रीयल टाइम-ऑफ-यूज़ टैरिफ आधारित डिमांड साइड मैनेजमेंट कंट्रोलर से लैस एक स्मार्ट डिवाइस को डिज़ाइन और विकसित करने के उद्देश्य से ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया लिमिटेड (ग्रिड-इंडिया) के अंतर्गत पूर्व क्षेत्रीय लोड डिस्पैच सेंटर (ईआरएलडीसी) के साथ साझेदारी की है। ग्रिड-इंडिया द्वारा संचालित पांच क्षेत्रीय लोड डिस्पैच केंद्रों (आरएलडीसी) में से एक, ईआरएलडीसी पूर्वी क्षेत्र की विद्युत प्रणाली की स्थिरता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। यह रीयल-टाइम निगरानी, लोड प्रबंधन और राज्य लोड डिस्पैच केंद्रों (एसएलडीसी) के साथ समन्वय के माध्यम से पूर्वी राज्यों में ग्रिड संचालन का प्रबंधन करता है।

इस परियोजना का उद्देश्य उपयोगकर्ता की सुविधा को बनाए रखते हुए बिजली की खपत और लागत को अनुकूलित करने में सक्षम एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता समर्थित स्मार्ट होम ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली विकसित करना है। यह प्रणाली समय-आधारित मूल्य निर्धारण, मौसम की स्थिति, उपस्थिति और उपयोगकर्ता की प्राथमिकताओं से प्राप्त डेटा को संसाधित करने के लिए स्मार्ट प्लग, सेंसर और एक माइक्रोकंट्रोलर को एकीकृत करेगी। मशीन लर्निंग और अनुकूलन एल्गोरिदम का उपयोग करके, यह लोड नियंत्रण को स्वचालित करेगी, मांग में लचीलेपन का समर्थन करेगी और ग्रिड की विश्वसनीयता को बढ़ाएगी।

इस सहयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, प्रो. प्रीति रंजन पांडा, संकायाध्यक्ष, कॉर्पोरेट संबंध विभाग, आई.आई.टी. दिल्ली ने कहा कि “यह साझेदारी भारत के ऊर्जा परिवर्तन का समर्थन करने वाले नवोन्मेषी समाधान विकसित करने पर आई.आई.टी. दिल्ली के फोकस को दर्शाती है। बिजली की बढ़ती मांग और गतिशील मूल्य निर्धारण संरचनाओं के साथ, उपभोक्ताओं को अपने ऊर्जा उपयोग को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करने के लिए स्मार्ट उपकरणों से सशक्त बनाना आवश्यक है। स्मार्ट होम प्रौद्योगिकियों के साथ कृत्रिम

बुद्धिमत्ता का एकीकरण बिजली प्रणालियों को टिकाऊ और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।”

“यह परियोजना वायरलेस नेटवर्क सुरक्षा और एन्क्रिप्शन तकनीकों के उपयोग के माध्यम से डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता पर भी ज़ोर देती है, जिससे उपकरणों और नियंत्रकों के बीच डेटा का सुरक्षित आदान-प्रदान सुनिश्चित होता है। एक उपयोगकर्ता डैशबोर्ड उपभोक्ताओं को वास्तविक समय में अपनी ऊर्जा खपत और बचत को आसानी से देखने में मदद करेगा।

इस परियोजना का नेतृत्व प्रो. अंकित सिंघल, विद्युत इंजीनियरी विभाग करेंगे। उन्हें प्रो. अभिजीत अभ्यंकर और प्रो. आनंदरूप दास, विद्युत इंजीनियरी विभाग तथा प्रो. तरुण मंगल, कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरी विभाग का सहयोग प्राप्त होगा।”

“यह शोध टीम विद्युत प्रणालियों, अनुकूलन (ऑप्टिमाइज़ेशन), कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वायरलेस नेटवर्क के विशेषज्ञों को एक साथ लाती है, ताकि भारत के स्मार्ट ऊर्जा तंत्र को आगे बढ़ाने वाला एक उपकरण तैयार किया जा सके और उसका प्रदर्शन किया जा सके।

इस अवसर पर श्री राजीब सूत्रधार, कार्यकारी निदेशक, ईआरएलडीसी ने कहा कि ‘आई.आई.टी. दिल्ली के साथ ईआरएलडीसी की यह साझेदारी बिजली प्रबंधन में उपभोक्ता भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। जैसे-जैसे भारत का विद्युत ग्रिड नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल तकनीकों को अपनाता जा रहा है, उपभोक्ता-आधारित मांग प्रतिक्रिया की भूमिका और भी अहम हो जाएगी। यह पहल ऐसी स्वदेशी तकनीक विकसित करने में मदद करेगी, जो संचालन की दक्षता और उपभोक्ताओं के सशक्तिकरण के बीच की दूरी को कम करेगी।’

श्री मानस दास (परियोजना प्रबंधक) ईआरएलडीसी ग्रिड-इंडिया और श्री आलोक प्रताप सिंह (परियोजना समन्वयक) ईआरएलडीसी ग्रिड-इंडिया भी इस शोध टीम का हिस्सा होंगे।”

प्रकाशन तिथि: 18 नवंबर, 2025