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Publish Date: January 5, 2026

आई.आई.टी. दिल्ली ने विचारपूर्ण श्रद्धांजलि और प्रेरणादायक संवादों के साथ मनाया जनजातीय गौरव दिवस

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नई दिल्ली: आई.आई.टी. दिल्ली में भगवान बिरसा मुंडा सेल (BBMC) ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के सम्मान में और भारत के आदिवासी समुदायों की समृद्ध विरासत और योगदान का जश्न मनाने के लिए एक यादगार संवादात्मक व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया। यह कार्यक्रम वर्ष भर चलने वाली जनजातीय गौरव वर्ष पहल का एक हिस्सा है, जिसे 15 नवंबर, 2024 से 15 नवंबर, 2025 तक मनाया जा रहा है।

5 नवंबर, 2025 को इस कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पार्पण के साथ हुई जिसमें प्रो. ए. के. नेमा (उप निदेशक, आई.आई.टी. दिल्ली); प्रो. दीपक कुमार, संकायाध्यक्ष, (विविधता तथा समावेशन कार्यालय); विशिष्ठ अतिथि श्री आर्मस्ट्रांग पामे, आई.ए.एस., संयुक्त सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, भारत सरकार; मुख्य वक्ता, प्रो. त्सेरिंग नूरबू, आई.आई.टी. दिल्ली; और प्रो. विवेक कुमार, समन्वयक बी.बी.एम.सी., एवं अध्यक्ष, सी.आर.डी.टी. समेत कई गणमान्य जन उपस्थित थे।

विद्यार्थी कलाकारों ने संगीत के माध्यम से विविधता में एकता का जश्न मनाते हुए “वंदे मातरम” की भावप्रवण प्रस्तुति दी

प्रो. विवेक कुमार, समन्वयक, बी.बी.एम.सी. ने प्रकोष्ठ की भूमिका और महत्त्व बताते हुए अपने उद्बोधन की शुरुआती की और सभी को इमर्शन गतिविधियों के ज़रिए सामुदायिक सहभागिता की परिवर्तनकारी भूमिका के बारे में बताया।

मुख्य वक्ता प्रो. त्सेरिंग नूरबू ने लद्दाख की आदिवासी विरासत और ज्ञान से जुड़ी दार्शनिक बातें सबके साथ साझा की। उन्होंने आदिवासी दुनिया को देखने के नज़रिए की दार्शनिक गहराई पर ज़ोर देते हुए श्रोताओं को लद्दाख में स्थानीय ज्ञान-मीमांसा और प्रकृति के व्यवहार से परिचित करवाया।

तत्पश्चात, अपने जनसाधारण कार्य और समुदाय आधारित विकास के लिए प्रसिद्ध आई.ए.एस श्री आर्मस्ट्रांग पामे ने सभी के साथ  दशकों के अपने अनुभवों से समुदाय संचालित नेतृत्व, जिजीविषा, एवं जनजातीय सशक्तीकरण पर अपने विचार व्यक्त किए जिसने दर्शकों पर अपना गहरा प्रभाव छोड़ा।

प्रकाशन तिथि: 6 नवम्बर, 2025