News

Publish Date: April 27, 2026

आई.सी.ई.एफ. रिपोर्ट : आई.आई.टी. दिल्ली के शोधार्थियों द्वारा भारत के ऊर्जा संक्रमण के संरचनात्मक और सामाजिक-आर्थिक अध्ययन पर जोर

Share this on

                         

नई दिल्ली:  सार्वजानिक नीति स्कूल, आई.आई.टी. दिल्ली के शोधार्थियों ने ‘इंडियाज़ क्लाइमेट एंड एनर्जी फ्रंटियर्स (आई.सी.ई.एफ.)’ विषयक बहु-संस्थागत रिपोर्ट में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। इस रिपोर्ट में विभिन्न आई.आई.टी., आई.आई.एस.सी. सहित अन्य कई संस्थानों के 350 से अधिक शोधार्थियों के विचार शामिल हैं।

यह रिपोर्ट भारत के सामाजिक-आर्थिक और संस्थागत संदर्भों में मौज़ूद बुनियादी समाधानों को आगे बढ़ाते हुए यहाँ की विशिष्ट संक्रमण संबंधी चुनौतियों को रेखांकित करने के समन्वित प्रयास को दर्शाती है।

इस प्रयास के एक भाग के रूप में प्रो. कावेरी अयचेट्टिरा, डॉ. द्वारकेश्वर दत्त, सुश्री मेधवी संधानी और प्रो. अंबुज सागर ने श्मिट साइंसेज़ (Schmidt Sciences) रिपोर्ट में “क्लाइमेट ट्रांज़िशन पाथवेज़” (Climate Transition Pathways) शीर्षक से एक अध्याय लिखा है। यह अध्याय भारत के ऊर्जा संक्रमण के कुछ प्रणालीगत और सामाजिक-आर्थिक पहलुओं का विश्लेषण करता है।

यह अध्याय इस बात पर ज़ोर देता है कि ऊर्जा संक्रमण केवल तकनीकी बदलावों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक प्रणालियों से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह अध्याय वर्तमान कई दृष्टिकोणों की प्रमुख सीमाओं की पहचान करता है, जिनमें पारंपरिक योजना का केवल तकनीकी समाधानों पर संकीर्ण ध्यान, भारत-विशिष्ट और एकीकृत मॉडलिंग ढांचों की कमी तथा व्यावहारिक, गुणात्मक और अनिश्चितता से संबंधित कारकों का सीमित समावेश शामिल है। यह ऊर्जा संक्रमण से जुड़े महत्त्वपूर्ण सामाजिक-
आर्थिक जोखिमों, जैसे कोयला-निर्भर क्षेत्रों पर प्रभाव, जैव ईंधन के विस्तार से जुड़ी खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताएँ तथा नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के कारण उत्पन्न भूमि-उपयोग संबंधी विवाद, को उजागर करता है।

इन कमियों को दूर करने के लिए, आई.आई.टी. दिल्ली के शोधार्थी भारतीय संदर्भों के अनुकूल अगली पीढ़ी के अंतरविषयी मॉडलिंग दृष्टिकोणों की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

प्रो. कावेरी अयचेट्टिरा, सार्वजनिक नीति स्कूल ने कहा- “इन अनुशंसाओं में एजेंट-आधारित मॉडलिंग जैसी उन्नत विधियों का उपयोग, विविध डेटा स्रोतों का समावेश तथा शहरीकरण प्रवृत्तियों, क्षेत्रीय रोजगार में बदलाव और राष्ट्रीय नीतियों के स्थानीय आर्थिक प्रभावों का आकलन करने की बेहतर क्षमता शामिल है”।

यह अध्याय सूचित और समावेशी नीति-निर्माण को समर्थन देने के लिए अकादमिक जगत, उद्योग और सरकार के बीच मज़बूत सहयोग के महत्त्व को भी रेखांकित करता है। यह अध्याय आई.आई.टी. दिल्ली के नेतृत्व में शुरू होने वाले एक रोमांचक अनुसंधान पहल “नेट जीरो इंडिया परियोजना” का मार्ग प्रशस्त करता है। इस परियोजना पर एक संक्षिप्त व्याख्यात्मक वीडियो यहाँ उपलब्ध है:  https://youtu.be/tjk2kSrdF-Q “क्लाइमेट ट्रांज़िशन पाथवेज़” के अलावा, आई.सी.ई.एफ. रिपोर्ट छह अन्य प्राथमिक शोध क्षेत्रों की पहचान करती है, जिनमें प्रमुख ऊर्जा प्रौद्योगिकियाँ, जलवायु वित्त मॉडलिंग, भूमि-आधारित कार्बन अवशोषण, जल और महासागर विज्ञान, निर्मित पर्यावरण तथा मजबूत (resilient) शहर शामिल हैं।

                                                                                                           ****

Press Release issued on 24-04-2026