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Publish Date: August 20, 2026

दृश्य प्रकाश की मदद से अप्राकृतिक अमीनो अम्ल तैयार करने की नई रासायनिक विधि विकसित

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आई.आई.टी. दिल्ली के शोधकर्ताओं ने अप्राकृतिक अमीनो अम्ल तैयार करने के लिए दृश्य प्रकाश से संचालित एक नई रासायनिक विधि विकसित की है। अप्राकृतिक अमीनो अम्ल आधुनिक चिकित्सा और जैव-प्रौद्योगिकी में अत्यंत उपयोगी उपकरण हैं। कई स्वीकृत दवाओं में संशोधित अमीनो अम्लों का उपयोग उनके चिकित्सीय प्रभावों को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है।

नई दिल्ली: जिस प्रकार हमारे बाएँ और दाएँ हाथ एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब होते हैं, उसी प्रकार कुछ अणु भी एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब होते हैं, जिन्हें एक-दूसरे पर पूरी तरह आरोपित नहीं किया जा सकता। इस गुण को काइरैलिटी (Chirality) या मॉलिक्यूलर हैंडेडनेस (Molecular Handedness) कहा जाता है। जीवित प्राणी अक्सर ऐसे मॉलिक्यूल (एनैंटियोमर) के दोनों रूपों को अलग-अलग तरीके से पहचानते हैं और उन पर अलग-अलग प्रतिक्रिया देते हैं, भले ही उनमें एक ही तरह के परमाणु एक ही क्रम में व्यवस्थित हों। यही मामूली-सा अंतर जीवन का आधार है। प्रकृति किसी एक मॉलिक्यूलर हैंड या एनैंटियोमर को दूसरे की तुलना में अधिक प्राथमिकता देती है। हमारी आनुवंशिक जानकारी को कोड करने वाले DNA से लेकर हमारी कोशिकाओं को ऊर्जा देने वाली शुगर तक, काइरैलिटी हर जगह मौजूद है। प्रोटीन में यह विशेषता सबसे अधिक उल्लेखनीय रूप से दिखाई देती है—ये सूक्ष्म मॉलिक्यूलर मशीनें हैं, जो हमारे शरीर के भीतर होने वाले लगभग सभी महत्त्वपूर्ण कार्यों को संचालित करती हैं।  

प्रोटीन छोटे-छोटे निर्माण खंडों से बने होते हैं, जिन्हें अमीनो अम्ल कहा जाता है। प्रोटीन में पाई जाने वाली काइरैलिटी का स्रोत भी यही अमीनो अम्ल हैं। यह तथ्य वास्तव में उल्लेखनीय है कि प्रकृति इन अमीनो अम्लों के केवल एक ही एनैंटियोमर का उपयोग करती है। हालाँकि, मॉलिक्यूलर हैंडेडनेस में किया गया मामूली-सा बदलाव भी किसी प्रोटीन के व्यवहार और संरचना को काफी हद तक बदल सकता है। दशकों से वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या प्रकृति द्वारा उपयोग किए जाने वाले अमीनो अम्लों के सीमित समूह का विस्तार किया जा सकता है। उनका उद्देश्य ऐसे अप्राकृतिक अमीनो अम्लों के नए निर्माण खंड तैयार करना है, जो प्रोटीन की स्थिरता, मजबूती और कार्यक्षमता को बेहतर बना सकें।

अप्राकृतिक अमीनो अम्ल आधुनिक चिकित्सा और जैव-प्रौद्योगिकी में शक्तिशाली उपकरण हैं। ये ऐसे जैव-अनुरूप पदार्थों के निर्माण को संभव बनाते हैं जो प्राकृतिक प्रोटीन की नकल करते हैं, साथ ही बेहतर स्थिरता, लंबे समय तक सक्रियता और बेहतर लक्ष्य चयन क्षमता प्रदान करते हैं। बोर्टेज़ोमिब, ऑक्ट्रीओटाइड और बैक्लोफेन जैसी कई स्वीकृत दवाओं में चिकित्सीय प्रभाव को बेहतर बनाने के लिए संशोधित अमीनो अम्लों का उपयोग किया जाता है। चिकित्सा के अलावा, अप्राकृतिक अमीनो अम्ल शोधकर्ताओं को प्रोटीन की संरचना और कार्य में बदलाव करने, जैविक प्रक्रियाओं का अध्ययन करने तथा नए कार्यों वाले अणुओं को डिज़ाइन करने में भी मदद करते हैं। इसके साथ ही, ये कार्बनिक संश्लेषण, उत्प्रेरण और उन्नत जैव-सामग्रियों के विकास में महत्त्वपूर्ण घटकों के रूप में कार्य करते हैं।

इन मूल्यवान निर्माण खंडों को अधिक कुशलता से तैयार करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, आई.आई.टी. दिल्ली के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. रवि पी. सिंह के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने अप्राकृतिक अमीनो अम्लों और पेप्टाइड्स के सटीक संश्लेषण के लिए एक नई विधि विकसित की है।

          

प्रो. सिंह ने कहा, “सबसे बड़ी चुनौती अमीनो अम्ल के केवल एक एनैंटियोमर को चयनात्मक तरीके से तैयार करना था, क्योंकि जैविक प्रणालियाँ आमतौर पर किसी अणु की एक विशिष्ट त्रि-आयामी संरचना को ही पहचानती हैं।”

शोधकर्ताओं ने दृश्य प्रकाश से संचालित एक नई रासायनिक रणनीति विकसित की है, जिससे अप्राकृतिक अमीनो अम्लों की त्रि-आयामी संरचना पर सटीक नियंत्रण रखते हुए उनका निर्माण किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने रासायनिक रूपांतरणों को उच्च स्तर की चयनात्मकता के साथ नियंत्रित करने के लिए प्रकाश ऊर्जा तथा काइरल कॉपर उत्प्रेरक–लिगैंड प्रणाली का भी उपयोग किया। यह विधि सरल और आसानी से उपलब्ध प्राकृतिक अमीनो अम्लों के निर्माण खंडों पर आधारित है और यह अलग-अलग तरह के अप्राकृतिक अमीनो एसिड बनाने के लिए नए रासायनिक समूहों को कुशलतापूर्वक जोड़ने की सुविधा देती है। इस तरीके का प्रमुख लाभ यह है कि यह अगली पीढ़ी के जैव-अणुओं के डिज़ाइन के लिए अप्राकृतिक अमीनो अम्लों का एक विस्तृत भंडार उपलब्ध कराता है।

प्रो. सिंह ने आगे कहा, “इस विधि से हम अप्राकृतिक अमीनो अम्लों (UAAs) और पेप्टाइड्स के 43 उदाहरण तैयार करने में सफल रहे। इस प्रकार, हमने विभिन्न अप्राकृतिक प्रोटीनों के निर्माण के लिए आवश्यक निर्माण खंड तैयार किए हैं। अप्राकृतिक अमीनो अम्लों को असीमित संभावनाओं के साथ अलग-अलग तरीकों से संयोजित किया जा सकता है, जिससे नए जैविक क्षेत्रों की एक पूरी दुनिया के द्वार खुलते हैं।”

यह शोध Org. Lett. 2026 में प्रकाशित हुआ है। (https://doi.org/10.1021/acs.orglett.6c02280).