संकाय के लिए

बाह्य पेशेवर गतिविधि

बाह्य पेशेवर गतिविधियाँ संकाय सदस्यों तथा संस्थान का मूल्यवर्धन करती हैं। ये गतिविधियाँ न केवल संस्थान की पहचान सुदृढ़ करने और पहुँच बढ़ाने में सहायक होती हैं, बल्कि संस्थान के अनुसंधान इकोसिस्टम के विकास एवं समृद्धि में भी योगदान देती हैं। संस्थान नियमित संकाय सदस्यों को इस प्रकार की गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है।

इस बात पर ज़ोर देना महत्त्वपूर्ण है कि किसी संकाय सदस्य द्वारा बाह्य पेशेवर गतिविधियों में भाग लेने से संस्थान की नियमित शिक्षण, अनुसंधान आदि गतिविधियों के प्रति उनके कार्यभार अथवा प्रतिबद्धता में किसी प्रकार की कमी ना हो।

बाह्य पेशेवर गतिविधियों में भाग लेने के अनेक तरीके हैं।

बाह्य पेशेवर गतिविधि

फिट प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार एवं उद्यमिता का क्षेत्रीय केंद्र है। इसका उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के वाणिज्यीकरण का संवर्धन, प्रोत्साहन करना तथा उसे बनाए रखना है। यह संस्थान में उद्यमी इकोसिस्टम को समृद्ध करने तथा प्रौद्योगिक वाणिज्यीकरण के प्रयासों को सुदृढ़ करने हेतु विभिन्न कार्यक्रम प्रदान करता है, जिनके अंतर्गत संकाय सदस्य—

i. किसी कंपनी से मेंटर के रूप में जुड़ सकते हैं।

ii. अपनी कंपनी स्थापित कर सकते हैं।

iii. संकाय उद्यमिता से संबंधित वित्तपोषण कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

टी.बी.आई. में विकसित प्रत्येक स्टार्ट-अप के लिए आई.आई.टी. दिल्ली के संकाय से एक मेंटर का होना अनिवार्य है।

समय प्रतिबद्धता- आई.आई.टी. दिल्ली में कार्यरत रहते हुए कोई भी संकाय सदस्य स्टार्ट-अप तथा परामर्श परियोजनाओं के लिए प्रति सप्ताह एक दिन समर्पित कर सकता है। संस्थान से अवकाश पर रहने की स्थिति में ही संकाय सदस्य इस प्रकार की गतिविधियों में प्रति सप्ताह एक दिन से अधिक समय व्यय कर सकता है।

भूमिका- किसी स्टार्ट-अप में संकाय-मेंटर की भूमिका केवल गैर-कार्यपालक प्रकृति की होगी। इसका मूल सिद्धांत यह है कि आई.आई.टी. के कर्मचारी के रूप में संकाय सदस्य को कंपनी की किसी भी कार्रवाई के लिए वित्तीय अथवा संविदात्मक रूप से उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता। अतः संकाय सदस्य कंपनी में सी-लेवल के कार्यपालक पद ग्रहण नहीं कर सकते। हालाँकि विश्राम अवकाश अथवा लियन पर रहने की अवधि के दौरान संकाय सदस्य इस प्रकार के पद ग्रहण कर सकते हैं। वित्तीय पहलू- संकाय-मेंटर कंपनी में शेयरधारक हो सकते हैं। शेयरों का प्रतिशत स्टार्ट-अप एवं संबंधित संकाय सदस्य के बीच आपसी सहमति से निर्धारित किया जाएगा।

हितों का टकराव

स्टार्ट-अप से जुड़े रहने के दौरान संकाय सदस्य द्वारा संस्थान की हितों के टकराव संबंधी नीति का अनुपालन करना अनिवार्य है। विशेष रूप से, संकाय सदस्य को आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करना होगा तथा अपनी सभी सहभागिताओं के साथ-साथ इस प्रकार की सहभागिताओं से जुड़े अपने परिजनों, विद्यार्थियों एवं पर्यवेक्षकों के संबंध में भी पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, उनकी शैक्षणिक गतिविधियों तथा स्टार्ट-अप के माध्यम से सृजित बौद्धिक संपदा के संबंध में भी पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है।

जब कोई संकाय सदस्य स्टार्ट-अप का मेंटर बनने के लिए सहमत हो जाता है, तो उसे फिट-आई.आई.टी. दिल्ली की वेबसाइट पर उपलब्ध निर्धारित फॉर्म भरना होगा तथा स्टार्ट-अप के साथ आपसी सहमति से तय की गई शर्तों एवं नियमों के साथ इसे प्रबंध निदेशक, फिट को प्रस्तुत करना होगा। इसकी एक प्रति संकायाध्यक्ष (संकाय) को भी प्रेषित की जानी आवश्यक है।

संकाय नवाचार एवं अनुसंधान-प्रेरित उद्यमिता कार्यक्रम [Faculty Innovation and Research-driven Entrepreneurship (FIRE)]

FIRE कार्यक्रम विशेष रूप से आई.आई.टी. दिल्ली के उन संकाय सदस्यों के लिए विकसित किया गया है, जो उद्यमिता के क्षेत्र में प्रवेश करना चाहते हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सशक्त वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित प्रौद्योगिकियों एवं अवधारणाओं का वाणिज्यीकरण करना है जिनसे व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य समाधान विकसित हो सकें।

संकाय द्वारा संचालित उद्यम आई.आर.डी., आई.आई.टी. दिल्ली द्वारा रु. 50 लाख तक का वित्तीय अनुदान प्राप्त करने के पात्र हैं।

संकाय सदस्यों की समय प्रतिबद्धता:

संकाय सदस्यों को इस प्रकार की गतिविधियाँ, अंशकालिक अथवा पूर्णकालिक आधार पर करने की अनुमति दी जा सकती है।

· पूर्णकालिक सहभागिता- यदि किसी संकाय सदस्य को इस प्रकार की गतिविधियाँ पूर्णकालिक आधार पर करने के लिए अनुमोदन प्रदान किया जाता है, तो उसे उद्यमिता के प्रथम वर्ष के दौरान विश्राम अवकाश अथवा इस तरह के अवकाश (Sabbatical Leave / Leave of the kind) पर जाना अनिवार्य होगा। आवश्यकता होने पर, वे अतिरिक्त दो वर्षों के लिए लियन पर जाने का अनुरोध भी कर सकते हैं।

· अंशकालिक सहभागिता – यदि कोई संकाय सदस्य FIRE गतिविधि में अंशकालिक आधार पर शामिल होना चाहता/चाहती है, तो ऐसी गतिविधियों के लिए प्रति सप्ताह एक दिन की वर्तमान निर्धारित मानदंड लागू होंगे।

राजस्व शेयरिंग/इक्विटी- इनक्यूबेशन अवधि के दौरान स्टार्ट-अप कंपनी के सकल वार्षिक टर्नओवर में से, उसकी सेल्स टर्नओवर का 3% तक संस्थान को देय होगा। फिट द्वारा इक्विटी धारण टी.बी.आई.यू. नियमों के अनुसार होगा (वर्तमान में 5%)।

संस्थान के संसाधनों का उपयोग- स्टार्ट-अप द्वारा उन संस्थागत सुविधाओं की घोषणा करनी होगी जिनका उसने उपयोग करने का अनुरोध किया है और जिनके उपयोग की अनुमति प्रदान की गई है। इन सुविधाओं के लिए लागू शुल्क, अधिसूचित टैरिफ के अनुसार भुगतान करना अनिवार्य होगा। (यदि किसी सुविधा के लिए पहले से कोई टैरिफ व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित इकाई द्वारा अनुमोदित टैरिफ चार्ट प्रस्ताव का हिस्सा होना चाहिए।)

आई.पी.आर.- संस्थान की आई.पी.आर. नीति लागू होगी। आई.आई.टी. दिल्ली की आई.पी.आर. नीति देखें। साथ ही, वित्तपोषण एजेंसियों के आई.पी. स्वामित्व से संबंधित प्रावधानों पर भी विचार किया जाएगा।

अन्य योजनाएँ

सरकारी/ कॉरपोरेट संगठनों की विभिन्न योजनाएँ प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित की जाती हैं, जिनके साथ फिट–आई.आई.टी. दिल्ली ने साझेदारी की है। इन योजनाओं के लिए फिट 'मेज़बान संस्थान' के रूप में कार्य करता है।

मेज़बान संस्थान के रूप में फिट–आई.आई.टी. दिल्ली इनक्यूबेशन सहायता प्रदान करने के लिए उत्तरदायी है, जिसमें इनक्यूबेशन हेतु आवेदनों की स्क्रीनिंग, स्टार्ट-अप्स की मेंटरशिप, नेटवर्किंग, निर्धारित माइलस्टोन्स की प्रगति की निगरानी, मूल/ प्रायोजक संगठनों से प्राप्त निधियों का वितरण आदि शामिल हैं। फिट–आई.आई.टी. दिल्ली में यह मेंटरशिप आई.आई.टी. दिल्ली के संकाय द्वारा प्रदान की जाती है।

सामान्यतः संकाय सदस्यों की सहभागिता पर नियमित नियम लागू होंगे। हालाँकि, प्रायोजक संगठन द्वारा निर्धारित किसी भी अतिरिक्त शर्तों पर भी विचार किया जाएगा।

प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाएँ

प्रायोजित अनुसंधान, आई.आई.टी. दिल्ली के संकाय सदस्यों की प्रमुख शैक्षणिक गतिविधियों में से एक है। इसके माध्यम से संकाय सदस्यों को ऐसे वित्तीय संसाधन प्राप्त होते हैं, जिनका उपयोग अनुसंधान अवसंरचना, मानव संसाधन, उपभोग्य सामग्री आदि के लिए किया जा सकता है, तथा यह संस्थान की प्रगति में भी योगदान देता है। संकाय सदस्य आई.आर.डी. के माध्यम से प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाओं में भाग ले सकते हैं।

परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी पी.आई. की होती है। इस संचालन में परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत मानव संसाधन की नियुक्ति, अनुमोदित उपकरणों की खरीद, वित्तपोषण एजेंसी की आवश्यकताओं के अनुसार नियमित वित्तीय एवं तकनीकी रिपोर्ट प्रस्तुत करना, तथा आवश्यकता पड़ने पर कुछ व्ययों के लिए पूर्वानुमोदन प्राप्त करना आदि शामिल हैं। इन सभी कार्यों के निष्पादन में वित्तपोषण एजेंसी के नियमों के साथ-साथ आई.आई.टी. दिल्ली के नियमों का पालन किया जाना अनिवार्य है। आई.आर.डी. द्वारा प्रशासनिक एवं लेखा संबंधी सहयोग प्रदान किया जाता है। यह सहयोग आई.आर.आई.एस. प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध है।

वित्तपोषण एजेंसी द्वारा प्रस्ताव की स्वीकृति के पश्चात परियोजना के संचालन तथा प्रस्ताव प्रस्तुतीकरण से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए आई.आर.डी. मैनुअल (पृष्ठ 11 से आगे) देखें।

परामर्श परियोजनाएँ –

आई.आई.टी. दिल्ली के संकाय सदस्य औद्योगिक परामर्श में भाग ले सकते हैं, जिसमें उद्योगों, सरकारी निकायों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को तकनीकी/वैज्ञानिक परामर्श प्रदान करना अथवा समयबद्ध एवं लक्षित अनुसंधान इनपुट देना शामिल हो सकता है। परामर्श परियोजनाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए आई.आर.डी. मैनुअल (पृष्ठ 18 से आगे) देखें।

प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाओं तथा परामर्श कार्यों के लिए बाह्य मानव संसाधन की नियुक्ति की जा सकती है। इस विषय में अधिक जानकारी के लिए आई.आर.डी. मैनुअल (पृष्ठ 23 से आगे) देखें।