संकाय के लिए

आनुशासनिक मामले

संस्थान में संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों तथा गैर-शैक्षिक कर्मचारियों से अनुशासन बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह अनुशासनहीनता के कृत्यों को हतोत्साहित करे तथा उनकी सूचना संबंधित प्राधिकरण को दे। आई.आई.टी. दिल्ली में आनुशासनिक मामलों के लिए विभिन्न निकाय उत्तरदायी हैं।

रैगिंग

रैगिंग एक दंडनीय अपराध है और आई.आई.टी. दिल्ली में इसके प्रति शून्य सहिष्णुता है। रैगिंग में अन्य विद्यार्थियों द्वारा नए/जूनियर विद्यार्थियों के प्रति दुर्व्यवहार, अपमान या उत्पीड़न शामिल हो सकता है। यह अक्सर मानसिक या शारीरिक यातना के समान होता है जो नए विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए हानिकारक होता है। यदि आपको ऐसी कोई गतिविधि दिखे तो उसे रोकें और अनुवर्ती कार्रवाई हेतु संकायाध्यक्ष, छात्र मामले कार्यालय को सूचित करें। आई.आई.टी. दिल्ली की एंटी-रैगिंग नीतियों को देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।

समान अवसर

आई.आई.टी. दिल्ली समान अवसर प्रदान करने वाला नियोक्ता है। यहाँ देश-विदेश से विद्यार्थी और संकाय सदस्य आते हैं। सभी के प्रति उनके लिंग, जाति, नस्ल आदि की परवाह किए बिना सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना आवश्यक है।

लिंग समानता एवं संवेदीकरण पहल (आई.जी.ई.एस.) आई.आई.टी. दिल्ली का लिंग संवेदीकरण पहल एवं समर्थन प्रकोष्ठ है, जो यह सुनिश्चित करता है कि आई.आई.टी. दिल्ली परिसर हिंसा एवं भेदभाव से मुक्त रहे और यहाँ एक सुरक्षित एवं समावेशी संस्कृति बनी रहे। इसका उद्देश्य लिंग, लैंगिकता एवं संबंधित मुद्दों पर सार्थक संवाद स्थापित करना और समर्थन प्रदान करना है।

यौन उत्पीड़न

"कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध, निवारण) अधिनियम, 2013" हमारे देश का विधि-सम्मत कानून है। यह अधिनियम कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करता है। इसके अंतर्गत यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों तथा उनसे जुड़े मामलों के निवारण की अनिवार्य व्यवस्था की गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रकाशित "कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, निषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013" विषयक हैंडबुक देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

आई.आई.टी. दिल्ली में महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध एवं दंड से संबंधित विस्तृत नियमों और प्रक्रियाओं को यहाँ देखें। इस दस्तावेज़ में संस्थान के उत्तरदायित्वों, शिकायत निवारण तंत्र (आंतरिक शिकायत समिति) तथा इसके अधिकारों एवं कर्तव्यों का विवरण दिया गया है। शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया देखने के लिए इस दस्तावेज़ के पृष्ठ 25 को देखें।

शैक्षणिक क्षेत्र में आनुशासनिक मामले

सभी संकाय सदस्यों द्वारा कक्षाओं, प्रयोगशालाओं तथा उनके बाहर भी सत्यनिष्ठा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इन मूल्यों को स्पष्ट एवं नियमित रूप से अभिव्यक्त करना तथा इनके उल्लंघन के परिणामों से अवगत कराना महत्त्वपूर्ण है।

आनुशासनिक मामलों में किसी भी नियम की अवहेलना शामिल है, जिनमें परीक्षा या असाइनमेंट में नक्ल करना (प्लेगरिज़्म), विद्यार्थियों, कर्मचारियों अथवा संकाय सदस्यों का उत्पीड़न आदि शामिल हैं। संकाय सदस्य मामूली उल्लंघनों को व्यक्तिगत स्तर पर संभाल सकते हैं, किंतु गंभीर उल्लंघन को विभागाध्यक्ष के माध्यम से संबंधित शैक्षणिक इकाई तथा संकायाध्यक्ष (शैक्षणिक/ विद्यार्थी/ संकाय) के माध्यम से संस्थान के संज्ञान में लाना अनिवार्य है।

हितों का टकराव

सभी संकाय सदस्यों के लिए यह अनिवार्य है कि वे संस्थान की हितों के टकराव (कॉनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) नीति का अनुपालन करें। संकाय सदस्यों से अपेक्षा है कि वे संस्थान के भीतर और बाहर अपने सभी कार्यकलापों, जिनमें प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष वित्तीय लेन-देन से जुड़े कार्य भी शामिल हैं, के संबंध में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखें। संस्थान के बाहर कार्य करने के लिए संकायाध्यक्ष (संकाय) से पूर्वानुमोदन प्राप्त करना आवश्यक है।

आई.आई.टी. दिल्ली में निभाई जा रही विभिन्न भूमिकाओं तथा संस्थान के बाहर की भूमिकाओं के कारण उत्पन्न होने वाले किसी भी वास्तविक अथवा संभावित हितों के टकराव की घोषणा, संबंधित शैक्षणिक इकाई के अध्यक्ष के माध्यम से संकायाध्यक्ष (संकाय) को करना अनिवार्य है। हितों के टकराव की सूचना देने हेतु संस्थान द्वारा निर्धारित प्रपत्र यहाँ देखें।

संकाय सदस्यों के आचरण नियमों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है- https://estb.iitd.ac.in/RulePosition/Faculty/Conduct.pdf

सरकारी कर्मचारियों के आचरण नियमों से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए परिनियम (स्टैच्यूट्स) की अनुसूची 'बी' देखें।