करियर उन्नति

सरकार (भारत सरकार) के नियमानुसार पीएच.डी. के बाद 3 वर्ष से कम अनुभव वाले व्यक्ति केवल "संविदा पर सहायक प्रोफेसर" पद के पात्र होते हैं। 3 वर्ष का अनुभव प्राप्त करने के बाद (भले ही यह अनुभव आई.आई.टी. दिल्ली में ही प्राप्त किया हो) सहायक प्रोफेसर के पद पर 'नियमित' नियुक्ति संभव है। यदि आप आई.आई.टी. दिल्ली में संविदा पर सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्त होते हैं, तो 3 वर्ष का अनुभव पूर्ण होने पर कृपया नियमित पद के लिए आवेदन करें। यह आवेदन अपनी शैक्षणिक इकाई के अध्यक्ष के माध्यम से करें। आवेदन प्रक्रिया के अंतर्गत आपको ई.आर.पी. में विशेष मूल्यांकन रिपोर्ट भी दर्ज करनी होगी। (आपको यह भी ज्ञात होना चाहिए कि प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष, जुलाई-जून के अंत में सभी संकाय सदस्यों के लिए वार्षिक स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट प्रस्तुत करना आवश्यक है।)

आपसे अपनी शैक्षणिक इकाई की 3-सदस्यीय समिति के समक्ष अपने कार्य को प्रस्तुत करने के लिए कहा जाएगा। इस समिति में आपकी इकाई के एक वरिष्ठ संकाय सदस्य तथा अन्य इकाइयों के 2 वरिष्ठ संकाय सदस्य सम्मिलित होते हैं। मूल्यांकन प्रक्रिया अपेक्षाकृत अनौपचारिक होती है। जो संकाय सदस्य नियमित सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्त होते हैं, उनके लिए भी 1 वर्ष की परिवीक्षा अवधि निर्धारित होती है। वर्षांत में, संविदा पर नियुक्त संकाय सदस्यों के समान, नियमित सहायक प्रोफेसरों से भी विशेष मूल्यांकन आवश्यक होता है। इस स्थिति में प्रत्यक्ष (इन-पर्सन) मूल्यांकन आवश्यक नहीं होता। इसके स्थान पर, शैक्षणिक इकाई के अध्यक्ष मूल्यांकन समिति के समक्ष संबंधित संकाय सदस्य के कार्य का पक्ष प्रस्तुत करते हैं। यदि प्रगति अपेक्षित स्तर के अनुरूप पाई जाती है, तो परिवीक्षा अवधि समाप्त कर दी जाती है तथा नियुक्ति की पुष्टि कर दी जाती है।

सह प्रोफेसर तथा प्रोफेसर के पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया को खुले विज्ञापन के माध्यम से की जाने वाली नई नियुक्तियों के समान माना जाता है। (बाह्य आवेदकों तथा आंतरिक आवेदकों की प्रक्रिया में कुछ सूक्ष्म अंतर होते हैं।) आवेदन संबंधित शैक्षणिक इकाई की "प्रोफेसर समिति" (सी.ओ.पी.) की संस्तुति के आधार पर संस्थान को अग्रेषित किए जाते हैं। प्रत्येक शैक्षणिक इकाई के लिए शॉर्टलिस्टिंग के मानदंड सी.ओ.पी. द्वारा निर्धारित किए जाते हैं। ये मापदंड संस्थान-स्तरीय न्यूनतम पात्रता मानदंडों (जिसमें अनुभव अवधि भी शामिल है) के अतिरिक्त होते हैं। सामान्यतः इन मानदंडो में प्रकाशन की गुणवत्ता, शिक्षण में योगदान, प्रशासनिक सेवा, बाह्य वित्तपोषित अनुदानों एवं परियोजनाओं में सफलता तथा आउटरीच गतिविधियाँ सम्मिलित होती हैं। अभ्यर्थी सी.ओ.पी. के सदस्यों तथा कुछ मामलों में निदेशक द्वारा गठित अंतिम चयन समिति के सदस्यों की उपस्थिति में अपना कार्य प्रस्तुत करते हैं, जो कि अनिवार्य है। इस प्रस्तुतीकरण के पश्चात चयन समिति द्वारा व्यक्तिगत साक्षात्कार आयोजित किया जाता है। साक्षात्कार के उपरांत चयनित अभ्यर्थियों को संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बी.ओ.जी.) के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, जो संस्थान के औपचारिक नियुक्ति प्राधिकारी हैं।