शिक्षण
आई.आई.टी. दिल्ली प्रतिवर्ष वर्ष सेमेस्टर I (जुलाई-दिसंबर) और सेमेस्टर II (जनवरी-मई) में स्नातक (यू.जी.) और स्नातकोत्तर (पी.जी.) स्तर के पाठ्यक्रम प्रस्तुत करता है। इसके अलावा, एक ग्रीष्मकालीन सेमेस्टर भी होता है, जिसमें बहुत कम पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। अधिकांश संकाय सदस्य केवल प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर के दौरान पढ़ाते हैं। सभी पाठ्यक्रमों की सूची कोर्सेज़ ऑफ़ स्टडी में उपलब्ध है। प्रत्येक शैक्षणिक इकाई इनमें से प्रत्येक सेमेस्टर में इनमें से कुछ पाठ्यक्रमों का चयन करती है और इनके लिए संकाय/संकायों को नामित करती है। एक इकाई का शिक्षण भार और संकाय शक्ति अन्य इकाईयों और अन्य सेमेस्टर में अलग हो सकते हैं। संकाय सदस्यों से शिक्षण भार साझा करने की अपेक्षा की जाती है। अधिकांश नए संकाय सदस्यों को शुरुआत में तैयार होने के लिए कुछ समय की आवश्यकता होती है और नए संकाय सदस्य को पाठ्यक्रम आवंटन के समय इकाइयों के अध्यक्ष इस बात को ध्यान में रखते हैं। कृपया शुरुआती कुछ सेमेस्टर में अपने अपेक्षित भार के बारे में अपने अध्यक्ष से बात करें।
पाठ्यक्रम क्रेडिट प्रणाली
आई.आई.टी. दिल्ली में प्रत्येक पाठ्यक्रम एक निश्चित संख्या में क्रेडिट प्रदान करता है और इसमें व्याख्यान, ट्यूटोरियल और प्रायोगिक घटक हो सकते हैं जिन्हें L-T-P संरचना से दर्शाया जाता है। इसलिए, एक 3-1-2 पाठ्यक्रम का अर्थ है कि 14-सप्ताह के सेमेस्टर में प्रति सप्ताह तीन घंटे व्याख्यान, एक घंटे शिक्षण और दो घंटे प्रायोगिक कक्षाएँ होती हैं। इस पाठ्यक्रम को उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थी को 5 क्रेडिट (एक घंटे का प्रायोगिक कार्य आधा क्रेडिट प्रदान करता है; अन्य घंटे पूर्ण क्रेडिट प्रदान करते हैं) प्राप्त होंगे। ट्यूटोरियल आमतौर पर छोटे समूहों (व्याख्यानों की तुलना में) में आयोजित किए जाते हैं और (व्याख्यान की तरह नई सामग्री को पेश करने के बजाय) समस्या समाधान अभ्यासों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। आई.आई.टी. दिल्ली कुछ गैर-क्रेडिट पाठ्यक्रम भी प्रदान करता है, जिनमें से कुछ सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य होते हैं। ये अभी भी शिक्षण भार का ही हिस्सा हैं और कुछ हद तक व्याख्यान की तरह काम करते हैं। इन पाठ्यक्रमों की सामग्री शिक्षण रूप में नहीं है, और उनके तरीके भिन्न हो सकते हैं। यदि आपको ऐसे पाठ्यक्रमों के एक भाग को पढ़ाने के लिए कहा जाता है, तो कृपया उन्हें पढ़ाने का अनुभव रखने वाले अध्यक्षों और अन्य लोगों से सहायता लें।
कुछ संकाय सदस्य पाठ्यक्रम के सभी घटकों के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं, जबकि अन्य केवल ट्यूटोरियल या प्रायोगिक घटकों के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। जिन पाठ्यक्रमों के शिक्षण में कई संकाय सदस्य में शामिल होते हैं, उनमें एक पदनामित पाठ्यक्रम समन्वयक होता है। समन्वयक एक समान नीति बनाए रखता है, परीक्षा और ग्रेडिंग का प्रबंधन करता है और पाठ्यक्रम के प्रशासन का प्रबंधन करता है। कई पाठ्यक्रमों में पी.जी. विद्यार्थियों (और कुछ विशेष मामलों में यू.जी. विद्यार्थियों) को शिक्षण सहायक के रूप में नियुक्त किया जाता है। किसी पाठ्यक्रम के लिए शिक्षण सहायक (टी.ए.) मुख्य रूप से उस पाठ्यक्रम को प्रस्तुत करने वाली शैक्षणिक इकाई (अध्यक्ष) द्वारा निर्धारित किए जाते हैं। शिक्षण सहायक (टी.ए.) पढ़ाते नहीं हैं, ये प्रशासनिक कार्यो में मदद करते है और पर्यवेक्षण के तहत ग्रेडिंग में उनकी सीमित भूमिका हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, टी.ए. निरीक्षण करने में मदद कर सकते हैं, वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्नों को चिह्नित कर सकते हैं, अंक सारणीबद्ध कर सकते हैं, व्यावहारिक सहायता आदि कर सकते हैं। टी.ए. उन विद्यार्थियों के लिए भी अच्छे माध्यम हो सकते हैं, जो प्रशिक्षक के पास जाने में उतने सहज नहीं होते हैं। इसके अतिरिक्त, एस.टी.आई.सी. (स्टूडेंट टीचर इंटरेक्शन काउंसिल), से मदद लेना भी उपयोगी है, जो विद्यार्थियों और संकायों के बीच अनौपचारिक संवाद और गतिविधियों को समर्थन देता है। (संकायाध्यक्ष, विद्यार्थी मामले कार्यालय से - https://dos.iitd.ac.in/ पर संपर्क करें)।
किसी कार्यक्रम के लिए एक पाठ्यक्रम मुख्य (अर्थात उस कार्यक्रम के सभी विद्यार्थियों के लिए उस पाठ्यक्रम को उत्तीर्ण करना आवश्यक है) या वैकल्पिक (जिसका अर्थ है कि विद्यार्थी उस पाठ्यक्रम को अपनी इच्छा से चुनते हैं) हो सकते हैं। प्रत्येक पाठ्यक्रम का एक लेबल अर्थात पाठ्यक्रम संख्या होता है जिससे यह पता चलता है कि वह किस शैक्षणिक इकाई द्वारा पढ़ाया जा रहा है और वह किस स्तर का पाठ्यक्रम है।
पाठ्यक्रम का पैटर्न
पाठ्यक्रम संख्या निम्नलिखित सामान्य पैटर्न का अनुसरण करते हैं:
• 100-400 स्तर के पाठ्यक्रम: यू.जी. कार्यक्रमों के लिए मुख्य और वैकल्पिक पाठ्यक्रम। ये पाठ्यक्रम किसी भी पी.जी. विद्यार्थी के लिए नहीं हैं।
• 500 स्तर के पाठ्यक्रम: एम.एससी. कार्यक्रमों के पाठ्यक्रम। ये पाठ्यक्रम अन्य पी.जी. विद्यार्थियों के लिए नहीं हैं।
• 600 स्तर के पाठ्यक्रम: एम.टेक कार्यक्रमों के लिए शुरूआती/ प्रारंभिक पाठ्यक्रम। ये पाठ्यक्रम आमतौर पर यू.जी. विद्यार्थियों के लिए नहीं हैं।
• 700-800 स्तर के पाठ्यक्रम: एम.टेक., एम.डिजा., एम.बी.ए., एम.एस (अनुसंधान) और पीएच.डी. प्रोग्राम के लिए मुख्य और वैकल्पिक पाठ्यक्रम। सामान्यत:, 800 स्तर के पाठ्यक्रम पी.जी. विद्यार्थियों के लिए उन्नत पाठ्यक्रम होते हैं। अगर यू.जी. विद्यार्थी कुछ जी.पी.ए. या क्रेडिट आवश्यकताओं को पूरा करते हैं तो वे इन पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकते हैं।
समय निर्धारण
प्रत्येक पाठ्यक्रम एक निर्धारित समय-सारणी स्लॉट में प्रस्तुत किया जाता है। (स्लॉटिंग पैटर्न देखें)। कुछ व्याख्यान स्लॉट एक घंटे लंबे होते हैं और अन्य डेढ़ घंटे लंबे होते हैं। मानक स्लॉट का उपयोग करने से संस्थान की समय-सारणी समिति के लिए पाठ्यक्रमों और परीक्षाओं की समय-सारणी बनाना आसान हो जाता है। समय सारणी वेबसाइट पर व्याख्यान, ट्यूटोरियल और परीक्षाओं के लिए कक्षाओं (रुम असाइनमेंट) की जानकारी दी गई है। किसी भी प्रयोगशाला-कार्य को संबंधित शैक्षणिक इकाइयों के लिए निर्धारित प्रयोगशालाओं में आयोजित किया जाता है। समय-सारणी वेबसाइट पर सेमेस्टर का शैक्षणिक कैलेंडर भी उपलब्ध होता है। ध्यान दें कि आई.आई.टी. दिल्ली में सप्ताह के कुछ दिनों को नया स्वरूप देने की परंपरा है। उदाहरण के लिए, बुधवार को मंगलवार की समय-सारणी के हिसाब से पढ़ाई हो सकती है। यह सुनिश्चित करता है कि एक सेमेस्टर में प्रत्येक सप्ताह दिवस में 14 कार्यात्मक दिन हों।
व्याख्यान कक्ष परिसर (लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स)
अधिकांश व्याख्यान लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में आयोजित किए जाते हैं। संस्थान की समय-सारणी में कमरा नंबर और समय बताया जाता है। व्याख्यान कक्ष में व्हाइटबोर्ड और ऑडियो/वीडियो उपकरण उपलब्ध हैं। किसी भी कक्षा सुविधा में समस्या के मामले में, सहायक कर्मचारी लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में मौज़ूद होते हैं (011 2659 7135 पर कॉल करें)। आई.आई.टी. दिल्ली उपस्थिति के लिए टिम्बल नामक एक प्रणाली का उपयोग करता है। आमतौर पर, इसमें शिक्षकों द्वारा बहुत कम हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है, और विद्यार्थियों को टिम्बल समर्थन टीम के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए। शिक्षक किसी भी समय उपस्थिति रिकॉर्ड देख सकते हैं। विद्यार्थियों द्वारा प्लेस्टोर से टिम्बल पेपरलेस उपस्थिति ऐप को इंस्टॉल करना अपेक्षित है।
प्रायोगिक पाठ्यक्रम
इंजीनियरों की शिक्षा और प्रशिक्षण में उत्कृष्टता प्राप्त करने के उद्देश्य से, आई.आई.टी. दिल्ली ने 1987 में शैक्षिक प्रौद्योगिकी सेवा केंद्र (Educational Technology Services Centre-ETSC) की स्थापना की। ई.टी.एस.सी. की प्रमुख गतिविधियों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए सहायता प्रदान करना; मीडिया आधारित निर्देशात्मक संसाधनों का विकास करना; शैक्षणिक और व्यावहारिक शोध का संचालन करना और परामर्श और प्रायोजित शोध परियोजनाएं शुरू करना शामिल है। ई.टी.एस.सी. कक्षा शिक्षण सहायक सामग्री को बनाए रखने के लिए भी जिम्मेदार है। ई.टी.एस.सी. का संपर्क विवरण यहां है।
एक शिक्षक के रूप में, आपकी भूमिका पाठ्यक्रम के पाठ्य विवरण और अधिगम उद्देश्यों को समझना तथा यह तय करना है कि सामग्री को कैसे गति प्रदान की जाए, यह निर्धारित करना है कि विभिन्न प्रकार के विद्यार्थियों को सीखने में मदद कैसे करें, मूल्यांकन के तरीके डिजाइन कैसे करें, और अंत में विद्यार्थियों को ग्रेड कैसे दें, आदि। आई.आई.टी. दिल्ली के पाठ्यक्रम में तीन निर्धारित परीक्षाएं होती हैं: माइनर 1, माइनर 2 और मेजर। इनपरीक्षाओं का कार्यक्रम समय सारिणी समिति द्वारा तैयार होता है और परीक्षा अवधि के दौरान कक्षाएं निलंबित कर दी जाती हैं। इनके अलावा, प्रशिक्षक अतिरिक्त परीक्षण, क्विज़, टर्म-पेपर, असाइनमेंट आदि निर्धारित कर सकते हैं। संस्थान विद्यार्थियों के साथ संवाद करने के लिए एक वेब आधारित Moodle को लाइव और एसिंक्रोनस लेक्चर के लिए एक प्लेटफॉर्म इम्पार्टस और माइक्रोसॉफ्ट टीम्स (शिक्षण, बैठक और सहयोग के लिए प्लेटफ़ॉर्म) के साथ एकीकृत किया गया है। संस्थान ने माइक्रोसॉफ्ट एप्लीकेशन और वनड्राइव संग्रहण के लिए 1 TB व्यक्तिगत संग्रहण स्थान के साथ ऑफिस 365 suite की सदस्यता भी ली है। साहित्यिक चोरी का पता लगाने के लिए Turnitin और moss जैसे बाहरी उपकरण उपलब्ध हैं। पुस्तकालय की वेबसाइट पर इनके लिंक उपलब्ध हैं, Turnitin पंजीकरण के लिए आप sysadm@cc.iitd.ac.in पर ईमेल कर सकते हैं। पियाज़ा (Piazza) जैसे अन्य साधन कक्षा के बाहर चर्चा करने और ग्रेडस्कोप परीक्षा और ग्रेडिंग को बढ़ावा देने के लिए उपयोगी हैं। पाठ्यक्रम प्रशासन और नीतियों की घोषणा पाठ्यक्रम की शुरुआत में की जानी चाहिए और इसे ऐसे स्थान पर भी पोस्ट किया जाना चाहिए जहां वे सेमेस्टर के दौरान उपलब्ध रहें। ऐसी पोस्ट किसी पाठ्यक्रम वेबसाइट या Moodle पर हो सकती है। ई.आर.पी. पाठ्यक्रम पर इसका सारांश भी पोस्ट किया जाना चाहिए। पाठ्यक्रम ई.आर.पी पंजीकृत विद्यार्थियों की सूची खोजने और सभी मूल्यांकनों के अंत में अंतिम ग्रेड में प्रवेश करने का स्थान भी है। ई.आर.पी. में एक खास सेमेस्टर में शुरू किए गए पाठ्यक्रम की जानकारी भी होती है। ध्यान दें कि शैक्षणिक इकाइयाँ प्रत्येक सेमेस्टर के अंत में एक ग्रेड अनुशोधन (मॉडरेशन) मीटिंग भी आयोजित करती हैं। मॉडरेशन के बाद ही, अंतिम ग्रेड ई.आर.पी. पर प्रस्तुत किए जाने चाहिए। एक बार जब इकाई अध्यक्ष इसे स्वीकार कर लेते हैं, तो बैकअप रिकॉर्ड के रूप में ग्रेड-शीट की हार्ड कॉपी भी जमा करनी होती है।
साहित्यिक चोरी और धोखाधड़ी के लिए आई.आई.टी. दिल्ली में शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) है। फिर भी, ऐसे मामले घटित होते हैं। यह शिक्षक की जिम्मेदारी है कि वह ऐसा वातावरण तैयार करे जो अनुचित साधनों को हतोत्साहित करता हो, और जब ऐसा होता है तो मामलों को सुलझाने में मदद करे। सख्त नीतियां निर्धारित करना और उन्हें कक्षा में दोहराना महत्वपूर्ण है। चूककर्ताओं को विभाग-स्तर और संस्थान-स्तरीय अनुशासनात्मक समितियों के समक्ष लाएं ताकि उचित दंड दिया जा सके और बार-बार ऐसा करने वाले दोषियों की पहचान की जा सके।
व्याख्यान-आधारित पाठ्यक्रमों से अलग, अधिकांश कार्यक्रमों में परियोजनाओं की आवश्यकता होती है। इन्हें 0-0-X संरचना वाले पाठ्यक्रमों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। प्रत्येक संकाय सदस्य आमतौर पर हर सेमेस्टर में कई विद्यार्थी परियोजनाओं का मार्गदर्शन करते हैं। इन परियोजना पाठ्यक्रम का मूल्यांकन प्रत्येक शैक्षणिक इकाई के भीतर गठित समितियों द्वारा किया जाता है। ऐसे परियोजना पाठ्यक्रम अक्सर शोध के लिए अच्छे अवसर प्रदान करते हैं।
पाठ्यक्रम प्रतिक्रिया
विद्यार्थियों को उनके द्वारा चुने गए प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए प्रत्येक सेमेस्टर में दो बार अपनी गुमनाम प्रतिक्रिया प्रदान करने के लिए कहा जाता है।
1. मध्यावधि प्रतिक्रिया (मिड-टर्म फीडबैक) - यह प्रतिक्रिया सेमेस्टर के बीच में मांगी जाती है ताकि शिक्षक पाठ्यक्रम के संचालन (course delivery) में आवश्यक बदलाव कर सकें। यह प्रतिक्रिया Moodle पर ली जाती है। संकायाध्यक्ष (अकादमिक) शिक्षकों को अपने पाठ्यक्रमों के लिए इसे स्थापित करने हेतु एक अनुस्मारक मेल भेजते हैं। शिक्षक प्रतिक्रिया प्रश्नों को आवश्यकतानुसार ठीक कर सकते हैं। शिक्षक प्रतिक्रिया अवधि के अंत में प्रतिक्रिया देख सकते हैं और तदनुसार उन पर कार्रवाई कर सकते हैं।
2. समापन प्रतिक्रिया (एंड-टर्म फीडबैक) - सेमेस्टर समाप्त होने के बाद यह प्रतिक्रिया मांगी जाती है। इसका उद्देश्य शिक्षक को यह जानकारी देना है कि पाठ्यक्रम का संचालन (course delivery) कैसा रहा और भविष्य में इसे बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। शिक्षक इसे ERP में देखते हैं और भविष्य के पाठ्यक्रमों में सुधार करते हैं।
यहां मध्यावधि और समापन प्रतिक्रियाओं के नमूने दिए गए हैं।
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