संकाय के लिए

भूमिकाएँ और उत्तरदायित्त्व

संकाय सदस्य इस संस्थान के प्राथमिक हितधारक हैं। कोई भी संस्थान नई ऊंचाइयों को तभी प्राप्त करता है, जब इसके संकाय सदस्य खुद उच्च लक्ष्यों को हासिल करने का प्रयास करें, अपने लिए और अपने कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लिए उच्च लक्ष्य निर्धारित करें और साथ ही, पेशेवर और सम्मानजनक व्यवहार करें। सभी संकाय सदस्यों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने पूरे कार्यकाल के दौरान आई.आई.टी. दिल्ली में अपनी पेशेवर और संस्थागत प्रतिबद्धताओं को पूरा करें। उन्हें नियमों, विनियमों और आचरण के नियमों की जानकारी होनी चाहिए। सरकार के सोशल मीडिया दिशानिर्देशों पर भी ध्यान दें: https://www.meity.gov.in/writereaddata/files/Approved%20Social%20Media%20Framework%20and%20Guidelines%20_2_.pdf

कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और दंड से संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं से संबंधित नीति देखें।

स्टाफ सदस्यों के लिए दिशानिर्देश देखें: https://iges.iitd.ac.in/sites/default/files/Guidelines%20for%20Staff%20Members_IIT%20Delhi.pdf

क्रय, भर्ती और अन्य निर्णयों में अक्सर संकाय सदस्यों की निर्णायक भूमिका होती है। संकाय सदस्यों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह सार्वजनिक विश्वास के संरक्षक के रूप में अपने उत्तरदायित्त्व के बारे में पूरी तरह से जागरूक रहें और उचित निर्णय ले सकें और संभावित हितों के टकराव के मामलों में खुद को अलग कर सकें (http://estb.iitd.ac.in/RulePosition/Faculty/Conflict.pdf)। यहां संस्थान के आचरण नियम देखें।

संकाय सदस्यों की मुख्य भूमिका में शिक्षण, अनुसंधान और सेवा शामिल हैं।

शिक्षण और अनुसंधान

आई.आई.टी.दिल्ली के संकाय सदस्यों की दो मुख्य भूमिकायें शिक्षण और अनुसंधान हैं। इन भूमिकाओं में कक्षा शिक्षण और अनुसंधान पर्यवेक्षण शामिल हैं। इनमें प्रत्येक संकाय सदस्य के अनुसंधान-क्षेत्र में शीर्ष अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रकाशन शामिल हैं। इनमें प्रमुख अनुसंधान व्ययों का समर्थन करने के लिए धन जुटाना भी शामिल है। यह उन्नत अनुसंधान सुविधाओं का निर्माण, प्रबंधन और संवर्द्धन से संबंधित है जो अन्य अनुसंधानकर्ताओं और सहयोगियों को भी आकर्षित करता है। यह अनुसंधान और विकास के माध्यम से महत्त्वपूर्ण स्थानीय और राष्ट्रीय समस्याओं के लिए समाधान तैयार करने से भी संबंधित है। इसके अलावा, संकाय के सदस्यों से विद्यार्थियों, जूनियर संकाय सदस्यों और पोस्ट-डॉक्टरल फेलो के मार्गदर्शक और रोल मॉडल्स के तौर पर कार्य करने की अपेक्षा भी की जाती है।

सेवा

प्रत्येक शैक्षिक इकाई का प्रबंधन मुख्य रूप से उसके संकाय सदस्यों द्वारा किया जाता है। संस्थान का संचालन भी किसी हद तक इसी तरह होता है। इसके लिए कई समितियों (इनमें से कुछ इस दस्तावेज़ में संदर्भित हैं जैसे एस.आर.सी. और डी.आर.सी.) में सेवा देना आवश्यक है। कुछ समितियों के उद्देश्य शैक्षणिक होते हैं, जबकि अन्‍य के प्रशासनिक। प्रोफेसरों की कई संस्थान स्तरीय समितियां नीतियों का लगातार मूल्यांकन और विकास कर रही हैं, जिनमें से कुछ नीतियां सरकार के औपचारिक संदेशों का प्रत्‍युत्‍तर होती हैं। यद्यपि अधिक अनुभवी फैकल्टी को ऐसी जिम्मेदारियाँ अधिक मिलती हैं, तथापि पूरी फैकल्टी से अपेक्षा की जाती है कि वे इसमें योगदान दें और अनुभव प्राप्त करें, ताकि भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकें। संकाय सदस्य संस्थान के बाहर भी पत्रिकाओं के संपादक, सम्मेलनों और राष्ट्रीय समितियों के अध्यक्ष के रूप में शोध समुदायों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाते हैं।

यह याद रखना भी जरुरी है कि अवकाश के दौरान भी हम आई.आई.टी.दिल्ली के संकाय सदस्य बने रहते हैं और हमें उस समय भी अपनी भूमिका का निर्वाहन करना चाहिए। यहां ध्यान देने वाली एक अन्य बात यह है कि, यहां "मून लाइटिंग" की कोई अवधारणा नहीं है, हम केवल आई.आई.टी.दिल्ली के संकाय सदस्य हैं- पूर्णकालिक एवं हर वक्त। इसका मतलब है कि किसी बाहरी संस्था से हमारे समय और विशेषज्ञता के लिए मिलने वाला कोई भी भुगतान आधिकारिक तौर पर आई.आई.टी.दिल्ली के संकाय सदस्य के रूप में ही अर्जित किया जाता है (सिवाय उस समय जब हम अवैतनिक अवकाश पर हों)। इन्हें या तो संस्थान के माध्यम से भुगतान किया जाता है या फिर, संस्थान को इनके बारे में बताया जाता है (और संस्थान वार्षिक राशि के आधार पर उस भुगतान का एक अंश प्राप्त करता है (नियमों के लिए देखें: http://estb.iitd.ac.in/RulePosition/Faculty/Honorarium.pdf)