संकाय के लिए

बाह्य निधियन (बाहरी फंडिंग)

संकाय सदस्यों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने शोध में सहायता के लिए बाहरी फंडिंग की खोज करें। भारत सरकार अपने कई मंत्रालयों और विभागों के माध्यम से अनुसंधान के लिए धन उपलब्‍ध कराती है। सरकार विशिष्ट क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए विशेष कार्यक्रम भी चलाती है। भागीदारी के लिए ऐसे कई कॉल आई.आर.डी. के आई.आर.आई.एस. सिस्टम पर सूचीबद्ध हैं। कई ईमेल द्वारा भी प्रसारित किए जाते हैं। कुछ बाहरी लिंक के लिए इस पृष्ठ में आगे देखें। वाणिज्यिक उद्योग भी अनुसंधान और विकास के लिए धन मुहैया कराती है और अक्सर विभिन्न अनुप्रयोगों पर आई.आई.टी. दिल्ली के संकाय सदस्यों के साथ साझेदारी करने के लिए उत्सुक रहती है। (ऐसे अवसरों की घोषणा वाले कॉर्पोरेट मामले संकायाध्यक्ष के ईमेल देखें।) आई.आई.टी. दिल्ली के संकाय यूरोपीय संघ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (यूएसए) आदि जैसी अंतरराष्ट्रीय फंडिंग एजेंसियों को अनुदान प्रस्ताव भेजने के भी पात्र हैं।

अनुदान प्राप्त करने की दिशा में पहला कदम अनुसंधान प्रस्ताव को विकसित करना है। प्रस्ताव आमतौर पर परियोजना के लक्ष्यों, इसके महत्व और संबंधित कार्य, जांचकर्ताओं की टीम और उनकी विशेषज्ञता, समयसीमा के साथ अनुसंधान योजना और आवश्यक खर्चों का वर्णन करते हैं। उपकरणों की बजटीय लागत GeM की विक्रेता वेबसाइटों से संपर्क करके प्राप्त की जा सकती है। आई.आर.डी. के वेबसाइट पर अनुसंधान और सहायक कर्मचारियों के लिए मानक वेतन की जानकारी दी गई है। इसके अलावा, विद्यार्थियों, संस्थान द्वारा वित्तपोषित पीएच.डी. स्कॉलर और पोस्ट-डॉक्टरल फेलो को बाहर से वित्तपोषित परियोजना में भाग लेने की अनुमति है। ऐसी भागीदारी के लिए विद्यार्थियों और पीएच.डी. स्कॉलर को एक छोटा मानदेय प्रदान किया जा सकता है। संकाय सदस्यों को वेतन पूरी तरह से संस्थान द्वारा दिया जाता है और अनुदान से भुगतान नहीं किया जा सकता है। (यदि निधियन एजेंसी सहमत हो तो एक टोकन मानदेय की अनुमति है।) ध्यान दें कि प्रत्यक्ष लागत, जिसमें उपकरण की लागत, अनुसंधान और सहायक कर्मचारियों/विद्यार्थियों के लिए वेतन, यात्रा और बैठक खर्च या अन्य आपूर्ति और विविध खर्च शामिल हैं, के अलावा, एक अतिरिक्‍त खर्च शामिल होता है-जैसे संस्थान द्वारा परियोजना के प्रबंधन, सहायक उपकरण, स्थान, बिजली, उपयोगिताओं, आदि के लिए छिपे हुए खर्च। इस तरह के बड़े खर्चों को बजट में जोड़ा जा सकता है, लेकिन नियमित खर्चों को प्रत्यक्ष लागत के प्रतिशत के रूप में एकमुश्त खर्च में शामिल किया जाता है। (वर्तमान ओवरहेड दरों के लिए https://ird.iitd.ac.in देखें।)

किसी परियोजना के शोधकर्ताओं में से एक प्रमुख शोधकर्ता (पी.आई.) होता है, जो परियोजना के प्रशासनिक प्रबंधन के लिए भी जिम्मेदार होता है। अन्य शोधकर्ताओं को सह-पी.आई. या कभी-कभी सह-शोधकर्ता कहा जाता है। बाहरी फंडिंग के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए प्रारंभिक बिंदु पी.आई. की अकादमिक इकाई की स्थायी अनुसंधान समिति है, जिसे क्रमशः विभागों, केंद्रों और स्कूलों के लिए डी.आर.सी., सी.आर.सी. और एस.आर.सी. कहा जाता है। इस दस्तावेज़ में हम इन्हें सामूहिक रूप से एक्‍स.आर.सी. कहेंगे। अपनी इकाई की अनुशंसा प्राप्त करने की प्रक्रिया का पालन करने के लिए कृपया अपनी इकाई के अध्‍यक्ष से परामर्श करें।

पी.आई. के लिए अगला कदम आई.आर.डी. के आई.आर.आई.एस. सिस्टम पर एक नया प्रस्ताव तैयार करना है (प्रायोजित परियोजनाएं नेविगेट करें ➔ नया प्रस्ताव प्रस्तुत करें)। एक्स.आर.सी. की सिफारिश के साथ प्रस्ताव को आई.आर.आई.एस. पर अपलोड किया जाता है। आई.आर.डी. टर्निटिन का उपयोग करके परियोजना प्रस्तावों को सत्यापित करता है, और प्रस्तुत करने के साथ एक रिपोर्ट संलग्न करता है। (पुस्तकालय या सी.एस.सी. आपके टर्निटिन खाते के संबंध में आपकी मदद कर सकता है।) प्रस्‍तुत करने के बाद, आपको आई.आर.आई.एस. पर आपके प्रस्ताव की स्थिति में बदलाव की रिपोर्ट करने वाले ट्रैकिंग ईमेल प्राप्त होगी। संस्थान द्वारा वित्त पोषण एजेंसी को औपचारिक रूप से प्रस्ताव दिए जाते हैं। एक बार जब आई.आर.डी. आपके प्रस्ताव प्रक्रिया को पूरा कर लेता है, तो आपको संस्थान का सबमिशन कवर लेटर प्राप्त होगा, जिसे आप उस प्रस्ताव में शामिल करेंगे जिसे आप निधियन एजेंसी को भेज रहे हैं। कुछ निधियन एजेंसियों को एक विशिष्ट प्रारूप में संस्थान प्रमाणन की आवश्यकता होती है। यदि इसकी आवश्यकता है, तो कृपया इस प्रारूप दस्तावेज़ को अपने प्रस्ताव के साथ आई.आर.आई.एस. पर अपलोड करें।

यदि किसी प्रस्ताव में सह-पी.आई. की भागीदारी शामिल है, तो पी.आई. को आई.आर.आई.एस. पर उनकी कर्मचारी आई.डी. जोड़नी होगी। आई.आर.आई.एस. ईमेल आमंत्रणों के माध्यम से उन्हें सह-पी.आई. बनने के लिए सहमति देने का प्रस्ताव भेजेगा। (आई.आई.टी. दिल्ली से बाहर के सह-पी.आई. भी इसमें भाग ले सकते हैं। ऐसे सह-पी.आई. की कर्मचारी आई.डी. की आवश्यकता नहीं है, लेकिन आई.आर.डी. के साथ ऐसे मामलों पर चर्चा करें।) एक बार जब सभी सह-पी.आई. की स्वीकृति मिल जाती है, तो आई.आर.आई.एस. इसे पी.आई., अध्‍यक्ष (कभी-कभी, सह-पी.आई. के अध्‍यक्ष/एक्स.आर.सी. को भी लूप में रखना जरूरी होता है- यह आई.आर.आई.एस. पर पूरी तरह से सक्षम नहीं है, लेकिन भविष्य में हो सकता है। सह-पी.आई. को इस विषय पर अपनी इकाई के अध्‍यक्षों से परामर्श करना चाहिए।) के माध्यम से आगे बढ़ाता है।

अध्‍यक्ष के अनुमोदन के बाद, संकायाध्‍यक्ष, आई.आर.डी. की बारी आती है। अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया में कभी-कभी एक सप्ताह का समय भी लग सकता है। इसलिए, इसे किसी भी डेडलाइन से पहले शुरू किया जाना चाहिए। पी.आई. के रूप में, आप प्रस्ताव की स्थिति को ट्रैक कर पाएंगे। संकायाध्‍यक्ष के अनुमोदन के पश्चात, संकायाध्‍यक्ष, आई.आर.डी. कार्यालय सही प्रारूप में आधिकारिक कवर-लेटर जारी करता है। पत्र निधियन एजेंसी (फंडिंग एजेंसी) को आश्वस्त करता है कि आई.आई.टी. दिल्ली में परियोजना को पूरा करने के लिए आवश्यक सुविधाएं हैं और यदि पी.आई. किसी कारण से परियोजना को पूरा नहीं कर पाते है तो उनके स्‍थान पर इसे पूरा करने के लिए अन्‍य कार्मिक उपलब्ध हैं।

अब, आप पूरा प्रस्ताव कागज पर या सॉफ्ट कॉपी अपलोड करके निधियन एजेंसी को भेज सकते हैं। विभिन्न निधियन संगठनों और संस्थानों द्वारा गठित प्रारंभिक करियर प्रोजेक्ट फंडिंग के अवसरों और पुरस्कारों के कुछ लिंक नीचे दिए गए हैं। युवा संकाय सदस्यों को विशेष रूप से इन अवसरों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है ताकि वे अपने शोध करियर की शुरुआत कर सकें और उन्‍हें आगे बढ़ा सकें।

• विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान बोर्ड (एस.ई.आर.बी.), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग स्‍टार्टअप अनुसंधान अनुदान (एस.आर.जी.) http://serb.gov.in/srgg.php

• परमाणु ऊर्जा विभाग डी.ए.ई.- युवा वैज्ञानिक अनुसंधान पुरस्कार (वाई.एस.आर.ए.) https://indiabioscience.org/grants/dae-young-scientists-research-award-ysra

• जैव प्रौद्योगिकी विभाग प्रारंभिक कैरियर वैज्ञानिक (ई.सी.एस.) http://www.dbtindia.nic.in/schemes-2/women-scientist-scheme-2/

पुरस्कार:

• वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद युवा वैज्ञानिक पुरस्कार http://csirhrdg.res.in/ysa1.htm

• युवा वैज्ञानिकों के लिए भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी आई.एन.एस.ए. पदक http://insaindia.res.in/aa4young1.php

• राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी एन.ए.एस.आई.-स्कोपस युवा वैज्ञानिक पुरस्कार http://www.nasi.org.in/

• भारतीय विज्ञान कांग्रेस एसोसिएशन युवा वैज्ञानिक पुरस्कार http://www.sciencecongress.nic.in/young_scientists_awards.php

• ऑक्सफोर्ड इंस्ट्रूमेंट्स यंग नैनो-साइंटिस्ट इंडिया अवार्ड https://www.ntforum.in/#award2019

• जैव प्रौद्योगिकी विभाग करियर विकास हेतु राष्ट्रीय जैव विज्ञान पुरस्कार। अभिनव युवा जैव प्रौद्योगिकीविद पुरस्कार (IYBA) राष्ट्रीय महिला जैव वैज्ञानिक पुरस्कार http://www.dbtindia.nic.in/funding-mechanism/awards/

• इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग यंग इंजीनियर अवार्ड https://www.inae.in/inae-young-engineer-award-2018/

• इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियर्स आई.ई.आई. यंग इंजीनियर्स अवार्ड https://www.ieindia.org/webui/IEI-Activities.aspx#young-engineering-awards

एक सामान्य नियम के रूप में, छोटे बजट (जैसे रु. 50 लाख से कम) वाले प्रस्तावों के लिए मूल्यांकन की प्रक्रिया कम होती है और फंड जल्दी मिल सकता है। फिर भी, फंड प्राप्त करने में कभी-कभी एक साल या दो साल से अधिक समय लग सकता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि फंडिंग एजेंसियाँ अक्सर पहले के प्रोजेक्ट पूरा करने के इतिहास को देखती हैं। यदि वह इतिहास लंबा नहीं है, तो हो सकता है वे बड़े फंडिंग का जोखिम न लें। ध्यान दें कि ये ग्रांट पहली नज़र में अंतरराष्ट्रीय ग्रांट की तुलना में कम लग सकते हैं, लेकिन कम लागत के कारण इनका उपयोग अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। हालांकि, फंडिंग की समय-सीमा लंबी हो सकती है। कृपया तदनुसार योजना बनाएं।

आमतौर पर, अनुदान की मंजूरी फंड आने से काफी पहले पी.आई. तक पहुंच जाती है। इस तरह की मंजूरी मिलने पर, आई.आर.आई.एस. पर प्रायोजित परियोजनाएं ➔ नई परियोजनाएं को नेविगेट कर नई परियोजना शुरू की जाती हैं। आई.आर.डी. तब एक विशिष्ट संदर्भ संख्या (जैसे RP1234) के साथ एक आंतरिक परियोजना तैयार करेगा। वास्‍तव में निधियन एजेंसी से पैसा आने पर इस परियोजना को वित्तपोषित किया जाएगा जोकि आमतौर पर इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण के माध्यम से होता है। आई.आर.डी. के पास आने वाली निधियों को विशिष्ट प्रस्तावों से जोड़ने का कोई तरीका नहीं होता है। अक्सर, पी.आई. भेजे गए धन की राशि (और तारीख) जानने वाले पहले लोगों में से एक होता है। पी.आई. अपनी संदर्भ संख्या का संदर्भ देते हुए प्राप्त धन को आंतरिक परियोजना में जमा करने के लिए आई.आर.आई.एस. पर एक सामान्य अनुरोध कर सकता है। पी.आई. किए गए प्रावधान के लिए धन का उपयोग करने के लिए जिम्मेदार होता है। उपयोग का अनुरोध (जैसे, उपकरण खरीद समिति और कर्मचारी चयन समिति गठन) आई.आर.आई.एस. के माध्यम से शुरू किए जाते हैं। पी.आई. उपयोगिता प्रमाणपत्र (यू.सी.) और व्यय विवरण (एस.ओ.ई.) सहित प्रगति रिपोर्ट निधियन एजेंसी को भेजने के लिए भी जिम्मेदार होता है। पी.आई. के अनुरोध पर यू.सी. और एस.ओ.ई. तैयार करने के लिए आई.आर.डी. जिम्मेदार होता है। ध्यान दें कि अधिकांश निधियन एजेंसियों के लिए वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है। इसका मतलब है कि इनमें से कई रिपोर्ट उन तारीखों से जुड़ी होती हैं।

अनुदान राशि का जिम्मेदारी से प्रबंधन करना महत्वपूर्ण है। संस्थान के पास विस्तृत क्रय आई.आई.टी.डी. भंडार एवं क्रय वेबसाइट और स्टाफ चयन आई.आई.टी.डी. आई.आर.डी. मैनुअल नियम हैं। यदि क्रय प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है तो विक्रेता को भुगतान में देरी या उससे इनकार किया जा सकता है। यह अनुभव कभी सुखद नहीं होता है। इसके अलावा, अनुदान से खरीदे गए गैर-उपभोज्य उपकरण को एन.सी.-फॉर्म में भरकर संकाय या स्टाफ सदस्य की व्यक्तिगत या प्रयोगशाला इनवेंटरी में जोड़ा जाता है। (आपकी विभागीय इकाई का स्टोरकीपर या अन्य कर्मचारी इसमें आपकी सहायता करने में सक्षम होने चाहिए।) अपनी इन्वेंट्री आइटम का ध्‍यान (Track) रखना महत्वपूर्ण है। निधियन एजेंसियों को यह अनुरोध करने का अधिकार है कि परियोजना के अंत में उन्हें उपकरण वापिस सौंपे जाएं।

सामान्य शोध शुरूआत सुझाव: यह संपर्कों और सहयोगों के निर्माण में सहायक है। आई.आई.टी. दिल्ली में कई विषयों में शोध मंच हैं; आप पाएंगे कि इस तरह की कई घोषणाएं आपके ईमेल पर आती रहती हैं। ये आपके फायदे के लिए हैं। कृपया परिचर्चा और अन्य मंचों में भाग लें, अपना परिचय दें, जानें कि दूसरे क्या करते हैं। नीचे दी गई तालिका में भारत की कुछ लोकप्रिय सरकारी निधियन एजेंसियों की जानकारी दी गई है। ये सभी अपनी विस्तृत वेबसाइट पर रिसर्च फंडिंग योजनाओं की जानकारी नियमित रूप से प्रकाशित करते हैं।

इकाई निधियन क्षेत्र
डी.एस.टी. विज्ञान और इंजीनियरिंग के सभी क्षेत्र।
डी.ई.आई.टी.वाई. सूचना और संबंधित प्रौद्योगिकियों के व्यापक परिनियोजन से संबंधित क्षेत्र।
डी.बी.टी. जैव चिकित्सा उपकरण, जैव रसायन, सेंसर, आदि।
एम.एन.आर. नवीकरणीय ऊर्जा।
इसरो इसरो मिशन और सक्षम प्रौद्योगिकियों के लिए बहुत विशिष्ट समस्याएं संबंधित पेलोड।
सी.एस.आई.आर. विज्ञान और इंजीनियरिंग के सभी क्षेत्र।
डी.आर.डी.ओ. रक्षा से संबंधित सभी क्षेत्र।
डी.ए.ई. विज्ञान और इंजीनियरिंग के लगभग सभी क्षेत्र।
एम.एच.आर.डी. शिक्षा प्रौद्योगिकी, सामाजिक विज्ञान आदि से संबंधित क्षेत्र।
बी.ए.आर.सी. परमाणु ऊर्जा और विज्ञान और इंजीनियरिंग के अन्य सभी क्षेत्र।

अभिनव परिवर्तन एवं प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण प्रतिष्‍ठान (फिट)

बाहरी संस्थाओं के साथ काम करने के लिए आई.आई.टी. दिल्ली एक बेहतरीन जगह है। इनमें से कुछ के पास परिसर में कार्यालय और उपस्थिति भी है। यदि आपके पास एक औद्योगिक साझेदार है जो आपके साथ साझेदारी करने को इच्छुक है, तो कृपया अभिनव परिवर्तन एवं प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण प्रतिष्‍ठान (फिट) से संपर्क करें। फिट आई.आई.टी. दिल्ली के स्वामित्व वाला एक गैर-लाभकारी संगठन है और औद्योगिक सहयोग और परामर्श का प्रबंधन करता है। इनके प्रक्रिया वर्तमान में पारंपरिक है और ये आई.आर.आई.एस. से जुड़े नहीं हैं। आपको संस्थान के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी रेगुलेशन (आई.पी.आर.) नीति के बारे में पता होना चाहिए। फिट आई.आई.टी. दिल्ली के पेटेंट पोर्टफोलियो का भी प्रबंधन करता है। यदि आप पेटेंट फाइल करना चाहते हैं, तो वे आपकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

उद्योग द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं में अक्सर प्रक्रियाओं के परिशोधन, एल्गोरिदम के विकास, योजना के प्रमाणीकरण आदि के लिए एक संगठन को बौद्धिक और वैज्ञानिक सेवा प्रदान करना शामिल होता है। फिट एक विस्तृत बजट बनाने और कार्य निष्पादन के लिए योजना बनाने के लिए 'सलाहकार' के रूप में नियुक्त संकाय सदस्यों की मदद कर सकता है। आपको इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि एक संकाय सदस्य ऐसी परामर्श गतिविधियों में एक वर्ष में अधिकतम 52 दिनों तक शामिल हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए https://fitt-iitd.in पर जाएं।